पापांकुशा एकादशी क्यों है खास, जानिए

पापांकुशा स्वर्ग, मोक्ष, आरोग्यता, सुंदर जीवनसाथी व अन्न-धन देने वाली

शनिवार 20 को आश्विन शुक्ल ग्यारस पर पापांकुशा एकादशी मनाई जाएगी। इसमें विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप के पूजन का विधान है।

शास्त्रनुसार पापांकुशा एकादशी हजार अश्वमेघ व सौ सूर्य यज्ञ के बराबर फल देती है। पाप रूपी हाथी को पुण्यरूपी अंकुश से वेधने के कारण ही इसे पापांकुशा कहते हैं।

श्री कृष्ण ने पद्म व ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसका वर्णन किया गया है। जिसके अनुसार पापांकुशा स्वर्ग, मोक्ष, आरोग्यता, सुंदर जीवनसाथी व अन्न-धन देने वाली है।

यह गंगा, गया, काशी, कुरुक्षेत्र व पुष्कर जैसी पुण्यवान हैं। इसके प्रताप से सहज ही विष्णु पद प्राप्त होता है। दस-दस पीढ़ी मातृ पितृ स्त्री व मित्र पक्ष का उद्धार होता है।

इस दिन जो व्यक्ति सोना, तिल, गाय, अन्न, जल, छाता व जूते दान करता है वो रोगों से बचकर स्वस्थ शरीर प्राप्त करता है।

स्पेशल पूजन विधि: घर की उत्तर-पूर्व दिशा में सफ़ेद कपड़े पर शेष शैया पर सोए विष्णु का वो चित्र रखें जिसमें से उनके नाभि से कमल उदय हो रहा हो।

पीतल का कलश स्थापित करें। कलश में जल, दूध, सुपारी, तिल व सिक्के डालें, कलश के मुख पर पीपल के पत्ते रख कर उस पर नारियल रखें तथा विधिवत पूजन करें।

तिल के तेल का दीप करें, चंदन की अगरबत्ती जलाएं, चंदन चढ़ाएं, नीले फूल चढ़ाएं, काली मिर्च युक्त बादाम की खीर का भोग लगाएं व 11 केलों का भोग लगाएं तथा तुलसी की माला से 108 बार यह विशेष मंत्र जपें। पूजन उपरांत खीर प्रसाद स्वरूप बांटे।

स्पेशल पूजन मंत्र: ॐ पद्मगर्भाय नमः॥

मध्यान मुहूर्त: दिन 11:43 से दिन 12:28 तक।

रात्रि पूजन मुहूर्त: रात 20:01 से रात 21:03 तक।

गुड हेल्थ के लिए: भगवान विष्णु पर शहद चढ़ाकर सेवन करें।

गुडलक के लिए: पानी में तिल मिलाकर भगवान विष्णु पर चढ़ाएं।

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