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नए संसद भवन का आकार तिकोना क्यों है? जानिए इसके पीछे की वजह

क्या आपको पता है कि नए भवन का आकार तिकोना क्यों है?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर को नए संसद भवन का शिलान्यास किया। टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के तहत इस भवन का निर्माण किया जा रहा है। नए संसद भवन के इमारत की शैली त्रिभुजाकार होगी। अपने आकार की वजह से ये इमारत काफी चर्चा में भी है। क्या आपको पता है कि नए भवन का आकार तिकोना क्यों है?

नए संसद भवन को वास्तु के अलावा हर लिहाज से सुंदर बनाने की कोशिश की गई है। वास्तुविदों ने इस नए भवन को बनाने के लिए कई देशों की संसद का निरीक्षण कर उनसे प्रेरणा ली। इस भवन का तिकोना आकार भी वास्तु के हिसाब से तय किया गया है। भारत की संस्कृति में त्रिभुज का काफी महत्व है।

इसका जिक्र वैदिक संस्कृति में भी मिलता है, जिसे त्रिकोण कहा जाता है। कई तरह के तांत्रिक अनुष्ठानों के दौरान भी त्रिकोण आकृति बनाई जाती है। मान्यता है कि इस आकृति से ही अनुष्ठान पूरा हो पाता है। नए संसद भवन का निर्माण वैदिक तरीके से होगा, ताकि देश की उन्नति में इमारत सहायक हो सके।

पुराने संसद भवन के ही बराबर में बनने वाले नए भवन के निर्माण की बोली पिछले महीने टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने 861.90 करोड़ रुपये में जीती थी। सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक, नए संसद भवन में एक ग्रांड संविधान हॉल भी बनाया जाएगा, जिसमें भारतीय सविधान की मूल प्रति के अलावा अन्य भारतीय लोकतांत्रिक विरासतों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा सांसदों के लिए लाउंज, पुस्तकालय, विभिन्न समितियों के कक्ष, खानपान कक्ष और पर्याप्त पार्किंग स्थल भी नए संसद भवन परिसर का हिस्सा होंगे।

हालांकि, नए संसद भवन का निर्माण कार्य पूरा होने तक वर्तमान भवन में ही संसदीय सत्र आयोजित किए जाएंगे और इन सत्रों में निर्माण कार्य के कारण खलल पैदा नहीं होने की बात भी सुनिश्चित की जाएगी।

लोकसभा में बैठ सकेंगे 888 सदस्य

लोकसभा सचिवालय के मुताबिक नए संसद भवन के लोकसभा कक्ष में 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। संयुक्त सत्र के दौरान इसमें 1224 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसी प्रकार, राज्यसभा कक्ष में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी।

नए संसद भवन में भारत की गौरवशाली विरासत को भी दशार्या जाएगा। देश के कोने-कोने से आए दस्तकार और शिल्पकार अपनी कला और योगदान के माध्यम से इस भवन में सांस्कृतिक विविधता का समावेश करेंगे। नया संसद भवन अत्याधुनिक, तकनीकी सुविधाओं से युक्त और ऊर्जा कुशल होगा।

मौजूदा संसद भवन से सटी त्रिकोणीय आकार की नई इमारत सुरक्षा सुविधाओं से लैस होगी। नई लोकसभा मौजूदा आकार से तीन गुना बड़ी होगी। राज्यसभा के आकार में भी वृद्धि की गई है। नए भवन की सज्जा में भारतीय संस्कृति, क्षेत्रीय कला, शिल्प और वास्तुकला की विविधता का समृद्ध मिलाजुला स्वरूप होगा। डिजाइन योजना में केंद्रीय संवैधानिक गैलरी को स्थान दिया गया है। आम लोग इसे देख सकेंगे।

हरित प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल

नए संसद भवन के निर्माण में हरित प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल होगा और पर्यावरण अनुकूल कार्यशैली को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे एवं आर्थिक पुनरूद्धार के द्वार खुलेंगे। इसमें उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनि तथा दृश्य-श्रव्य सुविधाएं, बैठने की आरामदायक व्यवस्था, प्रभावी और समावेशी आपातकालीन निकासी की व्यवस्था होगी।

उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन होगा

इमारत उच्चतम संरचनात्मक सुरक्षा मानकों का पालन करेगी, जिसमें भूकंपीय क्षेत्र 5 की आवश्यकताओं का पालन करना भी शामिल है और इसे रखरखाव तथा संचालन में आसानी होने के लिए डिजाइन किया गया है।

लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, नया संसद भवन भारत के लोकतंत्र और भारतवासियों के गौरव का प्रतीक होगा जो न केवल देश के गौरवशाली इतिहास अपितु इसकी एकता और विविधता का भी परिचय देगा।

सर लुटियंस की निगरानी में बना था मौजूदा भवन

वर्तमान संसद भवन का निर्माण प्रसिद्ध वास्तुकार सर एडविन लुटियंस और सर हरबर्ट बेकर की निगरानी में किया गया था। इसकी आधारशिला 12 फरवरी 1921 को द डयूक ऑफ कनॉट ने रखी थी। भवन का उद्घाटन भारत के तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड इर्विन ने 18 जनवरी 1927 को किया था।

वर्तमान संसद भवन एक वृहद वृत्ताकार भवन है जिसका व्यास 560 फीट है। इसकी परिधि एक तिहाई मील है और इसका क्षेत्रफल लगभग छह एकड़ है। इसके प्रथम तल के खुले बरामदे के किनारे पर क्रीम रंग के बालुई पत्थर के 144 स्तंभ लगे हुए हैं जिनकी ऊंचाई 27 फीट है।

छह साल में बनी थी मौजूदा इमारत

ये स्तंभ इस भवन को एक अनूठा आकर्षण और गरिमा प्रदान करते हैं। पूरा संसद भवन लाल बालुई पत्थर की सजावटी दीवार से घिरा हुआ है जिसमें लोहे के द्वार लगे हुए हैं। कुल मिलाकर इस भवन में 12 द्वार हैं। वर्तमान संसद भवन का निर्माण छह वर्ष में पूरा हुआ और निर्माण पर 83 लाख रुपये की लागत आई थी। सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली की पहली बैठक 19 जनवरी 1927 को संसद भवन में हुई थी। सुप्रीम कोर्ट में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर याचिका, केंद्र का जवाब- परिवार नियोजन के लिए मजबूर नहीं कर सकते

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