ज्योतिष

क्यों मनाई जाती है लोहड़ी का त्यौहार, जानें इससे जुड़ी परंपरा और महत्व

लोहड़ी शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है ल से लकड़ी, ओह से गोहा यानि जलते हुए उपले व ड़ी से रेवड़ी. लोहड़ी को लाल लाही, लोहिता व खिचड़वार नाम से भी जाना जाता है.

लोहड़ी का त्‍योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है. लोहड़ी के दिन को पौष माह का अंत और माघ के महीने की शुरुआत मानी जाती है. लोहड़ी का त्‍योहार एक-दूसरे से मिलने-मिलाने और खुशियां बांटने का त्‍योहार है.

लोहड़ी शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है ल से लकड़ी, ओह से गोहा यानि जलते हुए उपले व ड़ी से रेवड़ी. लोहड़ी को लाल लाही, लोहिता व खिचड़वार नाम से भी जाना जाता है.

सिन्धी समाज भी इसे लाल लाही पर्व के रूप में मनाया जाता है. लोहड़ी की लोह मतलब अग्नि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में जलाई जाती है.

यज्ञ पर अपने जामाता महादेव का भाग न निकालने के दक्ष प्रजापति के प्रायश्चित्त के रूप में इस अवसर पर परिजन अपनी विवाहिता पुत्रियों के घर से वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फल आदि भेजे जाते हैं.

लोहड़ी को पहले कई स्‍थानों पर लोह कहकर भी बुलाया जाता था. लोह का अर्थ होता है लोहा. यहां लोहे को तवे से जोड़कर देखा जाता है. लोहड़ी के मौके पर पंजाब में नई फसल काटी जाती है. गेहूं के आटे से रोटियां बनाकर लोह यानी तवे पर सेकीं जाती हैं. इसलिए पहले इस त्योहार को लोह के नाम से भी जाना जाता था.

लोहड़ी का त्योहार फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा हुआ है. किसान अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में लोहड़ी मनाते हैं. लोहड़ी की रात को साल की सबसे लंबी रात माना जाता है. लोहड़ी के दिन अग्नि व महादेवी के पूजन से दुर्भाग्य दूर होता है, पारिवारिक क्लेश समाप्त होता है तथा सौभाग्य प्राप्त होता है.

लोहड़ी पर विशेष पूजन-

– घर की पश्चिम दिशा में पश्चिममुखी होकर काले कपड़े पर महादेवी का चित्र स्थापित कर पूजन करें.

– सरसों के तेल का दीपक जलाएं, लोहबान से धूप करें, सिंदूर चढ़ाएं, बेलपत्र चढ़ाएं, रेवड़ियों का भोग लगाएं.

– सूखे नारियल के गोले में कपूर डालकर अग्नि प्रज्वलित कर रेवड़ियां, मूंगफली व मक्का अग्नि में डालें.

– इसके बाद सात बार अग्नि की परिक्रमा करें.

– लोहड़ी पूजा के साथ इस मंत्र का जाप करें: पूजन मंत्र: ॐ सती शाम्भवी शिवप्रिये स्वाहा॥

– लोहड़ी का पर्व मूलतः आद्यशक्ति, श्रीकृष्ण व अग्निदेव के पूजन का पर्व है.

नवविवाहित जोड़े के लिए लोहड़ी का महत्व-

यह त्योहार नवविवाहित जोड़े और परिवार में जन्मे पहले बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है. इस दिन नई दुल्हन को उसकी ससुराल की तरफ से तोहफे दिए जाते हैं, तो वहीं नए शिशु को उपहार देकर परिवार में उसका स्वागत किया जाता है.

लोहड़ी पर करें ये उपाय

– दुर्भाग्य दूर करने के लिए महादेवी पर चढ़ी रेवड़ियां गरीब कन्याओं में बाटें.

– पारिवारिक क्लेश से मुक्ति पाने के लिए उड़द और चावल की काली गाय को खिलाएं.

– सौभाग्य की प्राप्ति के लिए गुड़-तिल गरीबों को बांटे.

– आर्थिक समस्या के लिए इस दिन लाल कपड़े में गेहूं बांधकर किसी ब्राह्मण को दान करें.

– इस दिन तिल से हवन करना, तिल ग्रहण करना और दान करना हर तरह से शुभता लेकर आता

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