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राहुल और प्रियंका के आक्रामक रुख की सराहना नहीं करते, वो कांग्रेस में क्यों: दिग्विजय सिंह

मोदी को लेकर नरम रुख रखने वाले पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधा और सवाल किया

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर नरम रुख रखने वाले पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधा और सवाल किया कि जो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के आक्रामक रुख की सराहना नहीं करते, वो कांग्रेस में क्यों हैं ?

उन्होंने पार्टी के संगठन को फिर से खड़ा करने एवं मजबूत बनाने की पैरवी करते हुए राहुल गांधी से आग्रह किया कि वह दोबारा पार्टी की कमान संभालें। दिग्विजय सिंह के इस नए बयान को लेकर पार्टी के कई नेता किसी नए समीकरण के उभरने का अंदेशा जाहिर कर रहे है।

राज्यसभा सदस्य बनने के बाद दिग्विजय सिंह के हौसले बुलंद

राज्यसभा सदस्य बनने के बाद दिग्विजय सिंह के हौसले बुलंद है| उनके इस बयान के मायने भी निकाले जाने लगे है। कुछ नेता तो दबी जुबान से कह रहे है कि दिल्ली दरबार में दिग्गी राजा अब किसे निपटाने प्रगट हो रहे है। इन नेताओं के गले नहीं उतर रहा है कि अचानक दिग्विजय सिंह राहुल और प्रियंका की हौसला अफजाई में क्यों जुट गए है ?

दरअसल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट किया, ‘2019 में राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी के लिए वस्तुत: मुख्य चुनौती बनकर उभरे थे। उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष अथवा लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता के तौर पर पार्टी को खड़ा करने का काम जारी रखना चाहिए था। कांग्रेस में कोई भी उनके विरोध में नहीं है।’

उन्होंने प्रधानमंत्री पर हमले से परहेज की पैरवी करने वाले कुछ कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि , ” कांग्रेस में कौन लोग हैं जो प्रधानमंत्री मोदी को लेकर नरम रहने की पैरवी करते हैं? उनके पास यह साहस होना चाहिए कि वे पार्टी के भीतर अथवा सार्वजनिक तौर पर अपनी बात रखें।

दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि ‘मैं निजी तौर पर राहुल जी और प्रियंका जी के आक्रामक रुख का समर्थन करता हूं। वे भारत और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय हित के मुद्दों को उठा रहे हैं। अगर कांग्रेस में कुछ नेता इसकी सराहना नहीं करते तो फिर वे कांग्रेस में क्यों हैं?’

राहुल जी और प्रियंका जी के बहुआयामी नेतृत्व की जरूरत

हालांकि दिग्विजय सिंह ने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि ‘मैं चिदंबरम जी की सराहना करता हूं कि मनगढंत आरोप में जेल जाने के बाद भी वह नहीं झुके।’ सिंह के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व को संगठन के निर्माण की चुनौती हाथ में लेनी चाहिए। यहीं पर हमें राहुल जी और प्रियंका जी के बहुआयामी नेतृत्व की जरूरत है। मुझे भरोसा है कि दोनों में यह दम और साहस है कि वे ‘मोदी-शाह जोड़ी का मुकाबला कर सकें।

उन्होंने कहा, ‘यह गलत धारणा है कि मोदी-शाह ईडी, आयकर और सीबीआई के जरिए गांधी-नेहरू परिवार को डरा-धमका सकते हैं। यह परिवार अंग्रेजों से निडर होकर लड़ा और वर्षों जेल में रहा। ये लोग बहुत बहादुर हैं। इसलिए मोदी-शाह जी किसी भ्रम में मत रहिए।’

कांग्रेस के पूर्व महासचिव और मौजूदा राज्यसभा सदस्य ने कहा, ‘यही पूरे मामले का सार है और यही सोनिया जी, राहुल जी और प्रियंका जी के समक्ष चुनौती है। मुझे यकीन है कि वे ऐसा करेंगे। पूरी कांग्रेस पार्टी, चाहे बुजुर्ग हों या नौजवान, सभी आपके पीछे खड़े हैं और आप लोग जो चाहेंगे वो कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं। इसलिए राहुल जी, कृपया नेतृत्व करिए।’

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता द्वारा मोदी की कई बार प्रशंसा

दरअसल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मोदी की कई बार प्रशंसा कर चुके है। इसमें जयराम रमेश , कपिल सिब्बल और कुछ अन्य नेता समय-समय पर यह भी कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की निजी तौर पर अलोचना नहीं की जानी चाहिए। पिछले दिनों कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पार्टी के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता ने भी यही राय जाहिर की थी जिससे प्रियंका गांधी वाड्रा और कुछ अन्य नेताओं ने पुरजोर ढंग से असहमति जताई थी।

फ़िलहाल तो दिग्विजय सिंह का ट्वीट कई नेताओं को बुरी तरह से चुभ रहा है। हालांकि वे अपनी पहचान जाहिर किये बगैर यह तंज कस रहे है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की नैया डुबोने वाले अचानक ये कौन सा दांव आजमा रहे है।

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