…आखिर इस देश में सेक्स वर्कर को क्यों कहते है समाजसेवी

वेलिंगटन: जिस्मफरोशी को दुनिया भर में गंदा और गैर कानूनी धंधा माना जाता है लेकिन एक ऐसाभी देश है जहां इसे बुरी नजर से नहीं देखा जाता बल्कि समाजसेवा और कुशल रोजगार के तौर पर देखा जाने लगा है। इस धंधे से जुड़ी यौन कर्मियों की हैसियत भी यहां समाजसेवी से कम नहीं है जो कि अपने ग्राहकों को तय रकम के एवज में यौन सुख देती हैं। न्यूजीलैंड की इमीग्रेशन (आव्रजन) की वेबासाइट ने यहां सैक्स सेवाओं को ‘कुशल रोजगार सूची’ में शामिल किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक न्यूजीलैंड की इमीग्रेशन की वेबसाइट के अनुसार लिस्ट को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड व्यवसायों के मानक वर्गीकरण (एएनजेडएससीओ) के तौर पर रखा गया है, जिसमें यौन सेवाएं 5वें स्तर पर हैं। अगर यौनकर्मी प्रति घंटे के हिसाब से 36.44 डॉलर यानी आज की भारतीय मुद्रा के हिसाब से करीब 2433.28 रुपए कमाती हैं तो वह यहां का वीजा पाने के लिए उम्मीदवारी कर सकती है। न्यूजीलैंड एसोसिएशन ऑफ माइग्रेशन एंड इनवेस्टमेंट (एनजेडएएमआई) के मुताबिक इस प्रकार वीजा पाने की इच्छुक बाहरी यौनकर्मी वीजा के पाने के लिए सीधे तौर आवेदन कर सकती हैं।

वहीं इस क्षेत्र से जुड़ी यौनकर्मियों की भी अपनी चिंताएं हैं। हैमिल्टन की एक यौनकर्मी लीजा लेविस ने स्थानीय मीडिया न्यूजीलैंड हेराल्ड से अपनी चिंता और नाराजगी जाहिर की। लीजा लेविस ने कहा- ”जब अस्थाई श्रेणी वाली बाहरी यौनकर्मियों के द्वारा यौन सेवाएं देना गैर कानूनी है, तो इसे सूची में जोड़ना मूर्खतापूर्ण है।”स्थानीय मीडिया के मुताबिक न्यूजीलैंड सामूहिक वेश्यावृत्ति संस्था की सह-संस्थापक कैथरीन हीली यौन कर्मियों के कुशल रोजगार सूची में जोड़े जाने के बारे में वाकिफ हैं, लेकिन उनकी जानकारी में अभी तक यह बात नहीं आई है कि किसी यौन कर्मी ने अब तक इसका लाभ उठा पाया हो।

वहीं, आईएनजेड की प्रवक्ता की तरफ से साफ किया गया कि एजैंसी व्यावसायिक यौन सेवाएं प्रदान करने वाले या इस उद्देश्य वाले किसी भी व्यक्ति को रहने का ठिकाना या अस्थायी प्रवेश वीजा नहीं देती है। उन्होंने कहा कि यह वेश्यावृत्ति सुधार अधिनियम 2003 के अनुरूप था, जिसके अनुसार किसी को व्यावसायिक सेक्स सेवाएं देने, उसके संचालन करने या उसमें निवेश करने का इरादा रखने वाले को अस्थायी वीजा या अनुमति नहीं दी जा सकती है।

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