ज्योतिष

आखिर क्यों नौकरी में स्थिरता नहीं है?

आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) छतरपुर मध्यप्रदेश

किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए सम्पर्क कर सकते हो,
सम्पर्क सूत्र:- 9131366453

ऐसा कई बार होता है क‍ि हम पूरी मेहनत और लगन से कार्य करते हैं। लेक‍िन कभी सहयोगी तो कभी उच्‍चाधिकारी वजह-बेवजह परेशान करते ही रहते हैं। ऐसे में जॉब चेंज करने के ख्‍याल भी आते हैं।

अक्‍सर ही तमाम प्रयासों के बावजूद भी नौकरी में कई तरह की दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है। कभी प्रमोशन नहीं मिलता तो कभी मेहनत के सापेक्ष उच्‍चाधिकारियों का सहयोग नहीं मिलता। या फिर बार-बार नौकरी बदलनी पड़ती है।

लेक‍िन अगर आप अपनी नौकरी से संतुष्‍ट हैं और केवल इन द‍िक्‍कतों के उत्पन्न होने का कारक जानना चाहते हैं तो मैं बताता हूँ आपको कि ऐसा क्यों होता है यदि दशमेश कमज़ोर व शत्रु क्षेत्रीय हो तब भी जातक को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यदि दशमेश, भाग्येश, व धनेश ये तीनों कमज़ोर हो,

यदि किसी क्रुर ग्रह या शत्रु क्षेत्री ग्रह की दशा अंतरदशा चल रही है हो तब भी इस तरह की परेशानी उठानी पड़ती है।

शनि केतु की युति जीवन को संघर्ष पूर्ण बनाती है, करियर भी बहुत ही संघर्ष पूर्ण होता है‌। लाख मेहनत पर भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलता और फिर थक-हार कर व्यक्ति अपनी आजीविका ही बार बार बदलने पर मजबूर हो जाता है।

दशम भाव में राहु और केतु की द्रष्टि या स्थित होना भी नौकरी में स्थिरता नहीं रहने देता,

दशमेश व नौकरी का कारक ग्रह पीड़ित व शत्रु क्षेत्रीय हो । इत्यादि

नोट- यह कुछ समान्य नियम या योग है ज्योतिष के सही मायने में कुंडली का विश्लेषण करने के बाद ही बताया जा सकता है कि किस कारक व ग्रह योग की वज़ह से नौकरी में स्थिरता नहीं है।

किसी भी प्रकार की समस्या समाधान के लिए आचार्य पं. श्रीकान्त पटैरिया (ज्योतिष विशेषज्ञ) जी से सीधे संपर्क करें = 9131366453

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