क्या जीत का अंतर पाट पाएगी कांग्रेस या बदलेगी बिसात

प्रदीप शर्मा

कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र

कुनकुरी में कांग्रेस

के आगे चुनौती 

पत्थलगांव में होगी

कांटे की लड़ाई

रोहित कुमार साय
शिवशंकर पैकरा अविभाजित मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित बगीचा विधानसभा क्षेत्र को विलोपित कर साल 2003 के परिसीमन में अस्तित्व में आई कुनकुरी विधानसभा सीट में पिछले दो चुनाव से भाजपा का कब्जा रहा है। यहां भाजपा रिकार्ड मतों से जीतते आई है। ऐसे में इस चुनाव भाजपा के रनों के पहाड़ को लांघना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी। वहीं पत्थलगांव में ज्यादातर कांग्रेस जीत हासिल करती आई है। हालांकि पिछले चुनाव में यहां से भाजपा ने जीत हासिल की थी, पर इस बार यहां कांटे की लड़ाई है।

रायपुर: जशपुर राजघराने के प्रभाव क्षेत्र में आने वाली कुनकुरी सुरक्षित क्षेत्र में साल 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत मिली थी। इस सीट पर भाजपा ने जशपुर कुमार दिलीप सिंह जूदेव के करीबी भरत साय को अपना उम्मीदवार बनाया था।

वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े भरत साय ने सीधे मुकाबले में कांग्रेस के उत्तमदान मिंज को 9512 मतों से हराया। भाजपा के भरत साय को 57113 मत मिले वहीं कांग्रेस के उत्तमदान मिंज को 47521 मतों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में ईसाई मिशनरी के खिलाफ भाजपा आदिवासी भगत समाज को एकजुट रखने में कामयाब रही। यही वजह रही कि यहां से कांग्रेस के उत्तमदान मिंज को हार का सामना करना पड़ा।

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने अपने उम्मीदवार में बदलाव करते हुए रोहित साय को अपना प्रत्याशी बनाया। इस बार भी भाजपा की रणनीति कामयाब रही।

भाजपा के रोहित साय यहां से रिकार्ड मतों से जीत हासिल कर विधानसभा तक पहुंचने में कामयाब रहे। इस चुनाव में कांग्रेस ने नए चेहरे को मौका दिया था पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। यहां भाजपा के रोहित साय सीधे मुकाबले में कांग्रेस के अब्राह्म तिर्की को 28866 के रिकार्ड मतों के अंतर से हरा कर जीत हासिल करने में कामयाब रहे।

आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खाते में आए रिकार्ड मतों का अंतर पट पाना इस बार भी कांग्रेस के लिए सीधी चुनौती साबित होने वाली है। वहीं इस बार कुनकुरी विधानसभा में पत्थरगढ़ी मामले की गूंज भी सुनाई पड़ेगी। लिहाजा इस बार कांग्रेस को कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को शिकस्त देने के लिए किसी दमदाम जिताऊ प्रत्याशी की तलाश है वहीं भाजपा इस बार कौन सा मोहरा आगे बढ़ाएगी, इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

इस बार भाजपा को कुमार दिलीप सिंह जूदेव की कमी भी खल रही है। वहीं जोगी कांग्रेस के अध्यक्ष अजीत जोगी इस सियासी खालीपन का फायदा उठाने लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी कुनकुरी विधानसभा क्षेत्र में अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। कुनकुरी विधानसभा चुनाव में इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन रहे हैं पर भाजपा के किले में सेध लगा पाना फिलहाल आसान नजर नहीं आ रहा है।

कांग्रेस का गढ़ रहा है पत्थलगांव

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पत्थलगांव विधानसभा क्षेत्र ज्यादातर कांग्रेस उम्मीदवार ही जीत कर आते रहे हैं। यहां से कांग्रेस के रामपुकार सिंह लंबे समय तक जीत कर विधानसभा में पहुंचते रहे हैं। हालांकि पिछले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा पर हार-जीत का अंतर काफी कम था।

साल 2003 के विधानसभा चुनाव में यहां कांग्रेस ने रामपुकार सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया था। वहीं भाजपा की ओर से भाजपा के वर्ततान सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री विष्णुदेव साय चुनाव मैदान में थे। जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के रामपुकार सिंह सीधे मुकाबले में भाजपा के विष्णुदेव सिंह को 317 मतों के अंतर से हराया।

वहीं साल 2008 के चुनाव में पत्थलगांव विधानसभा में कांग्रेस ने दोबारा जीत हासिल की। इस बार भी कांग्रेस के रामपुकार सिंह व भाजपा के विष्णुदेव साय के बीच सीधा मुकाबला था। इस चुनाव में कांग्रेस के रामपुकार सिंह भाजपा के विष्णुदेव साय को 9916 मतों के अंतर से हरा कर विधानसभा तक पहुंचने में कामयाब रहे। कांग्रेस के रामपुकार सिंह को 64543 मत मिले वहीं भाजपा के विष्णुदेव साय को 54627 मतों से संतोष करना पड़ा।

2013 में भाजपा को मिली कामयाबी

साल 2013 में कांगे्रस के गढ़ पत्थलगांव में सेध लगाने के लिए भाजपा ने अपने पुराने चेहरे में बदलाव करते हुए शिवशंकर पैकरा को अपना उम्मीदवार बनाया। भाजपा की रणनीति इस बार कामयाब रही। और लगातार जीत हासिल करने वाले कांग्रेस के रामपुकार सिंह को हार का सामना करना पड़ा।

इस चुनाव में भाजपा के शिवशंकर पैकरा ने सीधे मुकाबले में कांग्रेस के रामपुकार सिंह को 3912 मतों के अंतर से हरा दिया। बता दें कि इस चुनाव में भाजपा ने पत्थलगांव को जिला बनाने का भरोसा मतदाताओं को दिलाया था, यही वजह है कि क्षेत्र के मतदाताआें ने भाजपा को जीता दिया।

इस बार भाजपा का यही अधूरा वादा भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के लिए चुनावी मुद्दा बन सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि उम्र दराज हो चुके कांग्रेस के रामपुकार सिंह की जगह इस बार कांग्रेस नए चेहरे को मौका दे सकती है। वहीं भाजपा के सामने अपना जीत बरकरार रखने की चुनौती होगी। फिलहाल यहां कांटे की टक्कर का अनुमान है।

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