क्या तखपुर में होगा तख्ता पलट या फिर राजू ही बनेगा जेंटलमैन

भरत ठाकुर

बिलासपुर।

आम तौर पर तखतपुर विधानसभा चुनाव में मुख्य मुक़ाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होता आया है. 1996 का उपचुनाव ही एक अपवाद था जहां बसपा कांग्रेस के मुकाबले में दूसरे स्थान पर रही थी. छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2003 के प्रथम प्रत्यक्ष चुनाव में कांग्रेस के ठाकुर बलराम सिंह लगभग 7 हजार मतों से भाजपा के जगजीत सिंह मक्कड़ को परास्त किये थे.

इसके बाद से भाजपा ने लगातार दो चुनावों में कांग्रेस को परास्त कर अपना कब्जा बरकरार रखा. 2008 में कांग्रेस विधायक बलराम सिंह के सामने भाजपा ने तत्कालीन मंडी अध्यक्ष राजू सिंह क्षत्री पर पहली बार दांव खेला और भाजपा को यहां लगभग 6500 की बड़ी जीत मिली, इस चुनाव में बसपा के संतोष कौशिक लगभग 19 हजार मत हासिल कर एक नई राजनीति का संकेत दिए.

2013 में भाजपा ने विधायक राजू सिंह क्षत्री को ही मैदान में उतारा और काँग्रेस ने ठाकुर बलराम सिंह के स्थान पर उनके ज्येष्ठ पुत्र आशीष सिंह को टिकिट दी. तीसरे समीकरण के रूप में संतोष कौशिक अपने जातिगत समीकरण के साथ बसपा से फिर मैदान में आये जबकि भाजपा टिकिट न मिलने से नाराज पूर्व विधायक जगजीत सिंह मक्कड़ शिवसेना का दामन थामकर बगावती बिगुल फूंक कर चुनावी ताल ठोक दिए. रोमांचक स्थिति और बन बिगड़ रहे समीकरण के बीच कोई भी जीत के दावे करने की स्थिति में नही था.

परिणाम भी काफी रोमांचक रहा और अति संघर्षपूर्ण इस मुकाबले में तमाम दावों को धकेलते हुए भाजपा के राजू सिंह क्षत्री ने 44735 वोट पाकर कांग्रेस के आशीष सिंह को 608 वोट के अंतर से हराया.

मतगणना से पहले जीत के दावे कर रहे बसपा के संतोष कौशिक को लगभग 29097 वोट पाकर तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा जबकि शिवसेना से लड़े जगजीत सिंह मक्कड़ को लगभग 9800 मत मिले. टिकिट को लेकर कांग्रेस में गृह कलह आशीष सिंह अब जबकि 2018 का विधानसभा चुनाव की दस्तक आरम्भ हो गई तो स्वाभाविक तौर पर दलीय टिकिट की छीना झपटी का खेल आरम्भ होगा ही.

भाजपा में अगर कोई बड़ा फेरबदल नही हुआ तो फिलहाल यही माना जा रहा है कि लगातार 2 चुनाव जीत चुके राजू सिंह क्षत्री पर ही भाजपा फिर दांव खेल सकती है पर काँग्रेस की स्थिति ये है कि उसे चुनाव लड़ने से पहले घर की लड़ाई लड़नी पड़ रही है. पिछले चुनाव को मात्र 608 वोट से हारे आशीष सिंह का प्रबल दावा तो बना ही हुआ है पर उनकी राह में कांटे बोने के लिए अब कांग्रेस में शामिल पूर्व विधायक जगजीत सिंह मक्कड़, जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र पांडेय, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष शिवबालक कौशिक, कांग्रेस सेवादल प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप ताम्रकार की टिकिट के लिए दी जा रही निरंतर चुनौतियां कांग्रेस के कलह को बढ़ाये हुए है.

स्थिति तो यहां ये है कि कांग्रेस टिकिट के लिए तखतपुर में आशीष वर्शेष महागठबंधन बना हुआ है. नीला हुआ गुलाबी संतोष कौशिक बसपा से 2 चुनाव लड़ चुके संतोष कौशिक इस बार जोगी काँग्रेस के प्रत्याशी घोषित हो गए है और उनका विश्वास है कि वे अपने पुराने जातिगत वोट तथा जोगी प्रभाव वोट बैंक के सहारे इस बार अपनी नैया पार लगा सकते है, पर उनका पिछले चुनाव वाला जो बूम वाला माहौल बना था वो वर्तमान परिदृश्य में फिलहाल नजर नही आ रहा.

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