छत्तीसगढ़

सूर्य ग्रहण पर विशेष स्वामी राजेश्वरानंद जी के साथ

ब्यूरो हेड आलोक मिश्रा

📿#सूर्य ग्रहण में साधना 📿-*

★ सबसे पहले तो , सूर्यग्रहण के समय किसी भी कारणवश घर के बाहर , विशेषतः खुले वातावरण में ना घूमे।
अपनी नौकरी या धंधे के लिये भी नही!!!
भले एक दिन की छुट्टी ही सही!!!
गृहिणी माता-बहने भी घर मे ही सही इतर काम ना करे , साधना ही करे।

★ वैसे भी ग्रहण-काल मे जप आदि बहुत प्रभावी और आवश्यक होता है और यह ग्रहण आध्यात्मिकता को उत्थान देनेवाला है इसलिये जप आदि साधना अधिकतम करे।

बाकी नियम तो आप तक पहुंच ही गये होंगे , अब बात करते है साधना की!

📿 इस समय का लाभ साधना के लिये अधिक से अधिक पूर्णता से ले।

📿साधना करते समय पास में गंगाजल रख सको तो बहुत अच्छा!

📿अगर आपने किसी भी गुरु से गुरुमंत्र लिया या नियमपूर्वक किसी मंत्र का आप जप करते है तो उस मंत्र का अधिकतम जप करें।ग्रहणकाल में जप ना करने से उसमे मलिनता आ जाती है।

📿विशेषतः साधक सत्संग का भी लाभ ले।सत्संग भगवदप्राप्ति के उपदेश वाले और वैसी ही भावना से सुने।ॐकार कीर्तन या इतर कीर्तन भी कर सकते है।

📿सूर्यग्रहण होने के कारण किसी भी सूर्यमंत्र या स्तोत्र का जप-पाठ करे।

📿साधको के लिये ” ॐ ह्रां ह्रीं सः सूर्याय नमः “का जप और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ श्रेष्ठ है।

📿 श्रीमद् भगवतगीता का पाठ अवश्य करे , सत्शास्त्र जैसे भगवद्गीता , रामायण का पाठ भी श्रेष्ठ है।

● ग्रहण-समाप्ति पर स्नान अवश्य करे पर उस समय रोज के स्नान के जैसे मंत्र ना बोले।

● स्नान के बाद सूर्यदेव के स्वच्छ बिंब का दर्शन अवश्य करे , पूजन करे , मंत्रसहित अर्घ्य दे।यह आवश्यक है।

● आसन , गौमुखी को पानी आदि से धो ले।जपमाला को गो-मूत्र से धोये।

#ग्रहण में क्या करें क्या न करें ?*

🌹सूर्यग्रहण तिथि – 21 जून 2020

🌹भगवान वेदव्यासजी कहते हैं : ‘‘सामान्य दिन से सूर्यग्रहण में किया गया पुण्यकर्म दस लाख गुना फलदायी होता है । यदि गंगाजल पास में हो तो दस करोड़ गुना फलदायी होता है ।’’

🌹ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।

🌹सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर श्रेष्ठ साधक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ ॐ नमो 🔅नारायणाय’ मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है।

🌹सुर्य ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक ‘अरुन्तुद’ नरक में वास करता है।

🌹ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।

🌹ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।

🌹सूर्यग्रहण पूरा होने पर सूर्य नारायण के शुद्ध बिम्ब दर्शन कर के अर्घ्य देना चाहिए। तत पश्चात भोजन ग्रहण करना चाहिये ।

🌹ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।

🌹ग्रहण के समय उपयोग किया हुआ आसान , गोमुखी ग्रहण पूरी होने के बाद धो लें , माला को पंचगव्य से स्नान करा लें अथवा शुद्ध गंगाजल से धो लें ।

🌹 ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए । ग्रहण के स्नान में गरम जल की अपेक्षा ठंडा जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है।

🌹ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।

🌹ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन – ये सब कार्य वर्जित हैं।

🌹ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

*🌹ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहईये

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