साल भर में सुरक्षाबलों ने बस्तर में मारे 90 नक्सली, 140 बने माओवादी

रायपुर /सुकमा : छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के अभियान प्रहार ने नक्सलियों की रीढ़ तोड़कर रख दी है। जुलाई 2016 से जुलाई 2017 के बीच 90 माओवादियों को हमारे जांबाज जवानों ने मार गिराया है। बस्तर में अब नक्सलियों के संगठन में भर्ती होने के लिए युवा भी खोजे से नहीं मिल रहे हैं। पहले जहां हर साल 500 युवा नक्सली संगठनों में भर्ती हुआ करते थे। इस बार उनकी तादाद 140 बताई गई। गुरुवार को इस बात की पुष्टि करते हुए डीआईजी दंतेवाड़ा सुंदरराज पी. ने कहा कि बस्तर की जनता की समझ में ये बात अब आने लगी है कि माओवाद का रास्ता खराब है। ऐसे में अब उनको शिक्षित कर समाज की मुख्यधारा में जोडऩे का प्रयास चलाया जा रहा है। ये साहित्य कुछ माह पहले गोल्लापल्ली इलाके में हुई मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों के हाथ लगे थे। ये गोंड़ी भाषा में लिखे गए हैं। इनका जब अनुवाद कराया गया तो ये सनसनीखेज खुलासे हुए। बताया जाता है कि उस साहित्य में इस साल अगस्त के अंतिम दिनों या फिर सितम्बर के शुरुआती दिनों में नक्सलियों की बैठक होने वाली थी जिसके लिए यह जानकारी बनाई गई थी।
उस साहित्य में लिखा गया था कि जुलाई 2016 से जुलाई 2017 तक नक्सलियों के करीब 90 लोग मारे गए। इनमें तोंडेमरका में काफी बड़ा नुकसान हुआ था। वहीं पुलिस की मानें तो पापाराव भी अक्सर बैठकों में तोंडेमरका का जिक्र किया है जिसमें करीब 45 नक्सली मारे जाने की बात कही। मुठभेड़ के बाद नक्सली अपने पर्चो और पोस्टर में नुकसान होने से इंकार करते रहे। जबकि कुछ और साहित्य में 45 लोग ही मारे जाने की बात कही गई है।

कहां कितने युवाओं की माओवादियों ने की भर्ती: वही साहित्य में नक्सली संगठन में भर्ती को लेकर भी लिखा गया है। साउथ बस्तर सुकमा जिले से मात्र 77 लोग भर्ती हुए जहां पहले करीब 300 लोग भर्ती हुआ करते थे। वही बाकी जगहों से दरभा 12, पश्चिम बस्तर 52 भर्ती हुए। जहां पुरे बस्तर से 500 लोग भर्ती हुआ करते थे। जो मात्र 140 लोगों पर आ गए।

सामने आई माओवादियों की असलियत : पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने कहा कि गोलापल्ली मुठभेड़ से जो साहित्य बरामद हुआ है। उसमें नक्सलियों के 90 लोगों के मारे जाने की बात लिखी हुई है। वहीं भर्ती में भी भारी कमी आई है। सुकमा जिले से जहां 300 नक्सली हर साल भर्ती हुआ करते थे, इस साल मात्र 77 नक्सली भर्ती हुए। पुलिस लगातार आपरेशन कर रही है। साथ ही तोंडेमरका में नक्सलियों को काफी नुकसान हुआ है। वही पुलिस ग्रामीणों के साथ बैठकें कर रही है जिसके कारण नक्सली संगठन से लोग कम जुड़ रहे हैं। नक्सलियों ने कई जानकारियां छुपाने की कोशिश की है। जारी पर्चो व पोस्टरों में उन्होंने 45 नक्सली ही मारे जाने की जानकारी दी। जबकि हाथ से लिखे इस साहित्य में 90 लोग लिखा हुआ है।

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