अंतर्राष्ट्रीय

गांजे की वजह से मानसिक समस्याओं से जूझ रही महिला ने की सुसाइड

कार पार्किंग की बिल्डिंग से कूदकर सुसाइड की थी

इंग्लैंड:गांजे की वजह से मानसिक समस्याओं से जूझ रही इंग्लैंड में रहने वाली 23 साल की युवती एमिली हेड ने कुछ समय पहले कार पार्किंग की बिल्डिंग से कूदकर सुसाइड की थी.

इस मामले में एमिली की मां केरी हेड ने कहा है कि उनकी बेटी की मौत गांजे की वजह से हुई है क्योंकि इसे पीने के बाद वो काफी डरी-सहमी (पैरानॉइड) महसूस करने लगती थी और ये उसके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा था.

इस महिला ने कहा कि गांजे को लेकर कई लोगों में एक साइकोलॉजिकल सुरक्षा का भाव होता है. कई लोग आपको कहते मिल जाएंगे कि शराब से लाखों लोग मर चुके हैं लेकिन गांजे से किसी की मौत नहीं होती है लेकिन मैं इस बात से असहमत हूं क्योंकि मेरी बेटी की मौत इसी से हुई है. हम उसकी मदद करना चाहते थे लेकिन वो हमें ऐसा नहीं करने देती थी और इसके चलते हम काफी असहाय महसूस करते थे.

उन्होंने आगे कहा कि हमने एक ड्रग हेल्पलाइन से बात की और उन्होंने हमें कहा कि हमें अपनी बेटी को पैसे नहीं देने चाहिए क्योंकि वो इन पैसों से गांजा खरीद लेती थी. हमें ये भी सलाह मिलती थी कि जब उसके हालात काफी खराब हो जाएंगे तो वो खुद समझेगी और वापसी करने में कामयाब होगी लेकिन सच्चाई ये है कि सुसाइड से कुछ समय पहले तक वो ये मान चुकी थी कि उसे दूसरे लोगों के विचार सुनाई दे रहे हैं.

कानूनी जांच में सामने आया कि इस लड़की को कई मानसिक समस्याएं थीं जिनमें डिप्रेशन भी शामिल हैं. एमिली में साइकोसिस के भी लक्षण देखने को मिले थे. इसके चलते लोगों को हैलुसिनेशन्स(मतिभ्रम) होने लगते हैं और वास्तविक जिंदगी से नाता टूटने लगता है. इससे पहले डॉक्टर्स ने एमिली में इमोशनली अनस्टेबल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर भी डिटेक्ट किया था. हालांकि एमिली अपने डॉक्टर्स से इन सब बातों को छिपाने की कोशिश करती थी.

गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में कई पश्चिमी देशों में गांजा और कई साइकेडेलिक ड्रग्स को लेकर लोगों का नजरिया बदला हुआ है और इसमें कई रिसर्च संस्थानों का काफी योगदान है जिन्होंने प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इन ‘ड्रग्स’ को एडिक्शन और डिप्रेशन के लिए काफी कारगर माना है. हालांकि गंभीर मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इन ड्र्ग्स का इस्तेमाल करने से पहले काफी सावधानियां और एहतियात बरतने के लिए भी कहा जाता है.

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button