तीन घंटे से तड़पती रही महिला,डॉक्टर नदारद

पेट दर्द का इलाज करने शनिवार की सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंची

धर्मेन्द्र कुमार राजपूत

बिलासपुर। जिला अस्पताल की दहलीज पर एक महिला तीन घंटे से दर्द से तड़पती रही। इस बीच उसकी बुजुर्ग मां व्हीलचेयर, स्ट्रेचर के साथ वार्ड ब्वॉय और डॉक्टर को खोजती रही, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।

पामगढ़ की ग्राम सेमरिया निवासी चंपा बाई (30) साल पेट दर्द का इलाज करने शनिवार की सुबह 10 बजे जिला अस्पताल पहुंची। उसके साथ मां जानकी बाई भी थी। अस्पताल के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही चंपा को असहनीय दर्द होने लगा।

इसी वजह से वह गेट के सामने ही लेट गई। तब उसकी मां जानकी मदद के लिए अंदर गई। बुजुर्ग महिला वार्ड ब्वॉय और डॉक्टर को खोजने लगी। अंदर उसकी मदद करने के लिए कोई नहीं मिला।

इसके बाद उसने अपनी बेटी को डॉक्टर तक पहुंचाने के लिए लोगों से गुहार लगाई। सभी ने उसकी अनदेखा कर दी। दोपहर एक बजे तक बुजुर्ग महिला स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के लिए इधर-उधर भटकती रही है।

वह भी नसीब नहीं हुआ। इसके बाद मीडिया कर्मियों की नजर उस महिला पर पड़ी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को जानकारी दी और चंपा को डॉक्टर के पास ले गए। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए भर्ती कर लिया गया।

वार्ड ब्वॉय नहीं थे ड्यूटी में

इस दौरान एक भी वार्ड ब्वॉय ड्यूटी में नहीं था। जबकि सुबह की शिफ्ट में मरीजों की मदद के लिए चार वार्ड ब्वाय की ड्यूटी लगाई जाती है। वार्ड ब्वाय के संबंध में प्रबंधन भी कोई जवाब नहीं दे पाया।

हर दिन होती है परेशानी

जिला अस्पताल में अव्यवस्था के कारण हर दिन मरीजों को परेशानी होती है। कमजोर प्रबंधन और दबाव नहीं होने से कर्मचारी के साथ डॉक्टर मनमानी करते हैं।

इसी वजह से आए दिन कर्मचारी ड्यूटी से नदारत रहते हैं और व्यवस्था बिगड़ जाती है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ता है।

एक घंटे देर से शुरू होती है ओपीडी

ओपीडी शुरू होने का समय सुबह नौ बजे है। लेकिन डॉक्टर व कर्मचारियों का अस्पताल पहुंचना साढ़े नौ बजे से शुरू होता है। ऐसे में ओपीडी का काम 10 बजे से ही शुरू हो पाता है। जबकि मरीजों की भीड़ सुबह नौ बजे से लग जाती है।

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