कुछ कर गुजरने के जज्बे से महिलाएं बन रही आत्मनिर्भर

ग्रामीण आजीविका मिशन : गांवों में महिलाएं कर रही हैं किराना दुकान का संचालन

रायपुर: इंसान में अगर हिम्मत और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी राह मुश्किल नहीं। यह बात नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत गरांजी की माँ काली स्व सहायता समूह की साक्षर महिलाओं ने सच कर दिखायी है।

जिले के छोटे से गांव गरांजी की राधिका कचलाम और उनके जैसी 9 अन्य महिला सदस्यों ने विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बीच किराना दुकान का सफल कारोबार करके यह साबित कर दिया है कि गांव में भी किराना दुकान संचालित कर व्यवसाय के क्षेत्र में महिलाएं भी विशेष पहचान बना सकती हैं।

अब तक इस समूह की महिलाएं छोटे-मोटे काम और आपसी लेन-देन का ही काम करती थी, जिससे बहुत कम आमदनी हो पाती थी।

मां काली स्व-सहायता समूह की सदस्य राधिका कचलाम ने बातचीत के दौरान बताया कि ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से वर्ष 2016 में उन्होंने समूह का गठन किया।

अपने समूह में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए उन्होंने स्थानीय बैंक से एक लाख रूपये की वित्तीय मदद लेकर किराना दुकान की शुरूआत की। उन्होंने बताया कि समूह की सभी महिलाएं अपने घरेलू काम को पूरा करने के बाद दुकान में आकर बारी-बारी से दुकान का संचालन करती हैं।

शुरूआती दौर में दुकान में आसपास के स्कूल, छात्रावासांे में रहने वाले बच्चों के लिए कापी, पेन, चाकलेट, बिस्किट आदि सामान रखना शुरू किया। जैसे-जैसे समय बितता गया समूह की महिलाओं की आमदनी भी बढ़ती गई। किराना दुकान से महीने में अच्छी आमदनी भी होने लगी।

समूह द्वारा बैंक ऋण की पूरी राशि जमा करायी जा चुकी है। समूह की महिलाओं के पास अतिरिक्त आमदनी होने से जीवन स्तर में सुधार होने लगा है। महिलाओं द्वारा संचालित इस किराना दुकान से आसपास की महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।

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