करू भात खाकर महिलाएं आज शुरू करेंगी तीजा उपवास

-जागेश्वर सिन्हा

बालोद :

जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर गुंडरदेही के आखिरी सीमा पर बसे ग्राम पसौद के ग्रामीणों ने विशेष पहल की है। जहाँ पिछले साल की तरह इस साल भी सभी तीजहारिन महिलाओं को रात्रि में करू भात खिलाई जाएगी।

ग्रामीणों की मदद से ऐसे कार्यक्रम के आयोजन का यह दूसरा वर्ष है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के सभी घरों में आई तीजजहारिन महिलाएं सहित घर की महिलाएं भी आज एक साथ सामूहिक भोजन करेंगे। युवाओं ने ग्रामीणों से चंदा इकट्ठा कर तीजहारिन महिलाओं को एक जगह पर एक साथ भोजन कराने का अनोखा प्रयास किया है। यह दूसरा साल है,पिछले साल भी इस तरह की व्यवस्था की गई थी।

कोई चावल, कोई दाल, तो कोई सब्जी का सहयोग देकर इस दिन को खास बनाने का प्रयास किया है। पिछले साल लगभग 500 महिलाओं से ज्यादा की संख्या में एक साथ करू भात खाई थी।

इसलिए महिलाएं मनाती हैं तीज

तीजा मनाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि जब हिमालय के राजा दक्ष अपनी पुत्री पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन पार्वती ने भगवान शंकर को ही अपना पति मान लिया था।

जब पार्वती ने यह बात अपनी सहेली को बताई तब उनकी सहेली ने राजा दक्ष के महल से तीज के दिन पार्वती का हरण कर उन्हें जंगल में ले गईं इसलिए इसे हरतालिका तीज भी कहा जाता है।

शंकरजी को पाने के लिए इसी दिन पार्वती ने दिन-रात बिना कुछ खाए पिए कठोर तपस्या की थी। इसके बाद पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर शंकरजी ने पार्वती से विवाह किया। तीजा पर इसी मान्यता के चलते कुंवारिया श्रेष्ठ वर पाने तथा सुहागिनें पति की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए उपवास रहकर पार्वती-शंकर की पूजा-अर्चना करती हैं।

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