छत्तीसगढ़

आजीविका संवर्धन की दिशा में महिला समूह की अग्रणी भूमिका

राजशेखर नायर:

नगरी: विकासखंड की स्वसहायता समूह की महिलाएं अलग-अलग तरह के उत्पादों से जुड़कर स्वरोजगार अपना रही है। स्वसहायता समूह की ये सभी महिलाएं न केवल आर्थिक मोर्चे पर आत्मनिर्भर है बल्कि अपने कौशल आत्मविश्वास और मेहनत से महिला सशक्तिकरण की नई इबादत लिख रही है।

जिले के सभी विकासखंडों में महिलाओं द्वारा स्वरोजगार की अनेक गतिविधियां संचालित कर रही है। आजीविका संर्वधन के इस दिशा से महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही है। यह भी माना जा रहा है कि महिलाओं की सांगठनिक विश्वास, कुशलता और आत्मविश्वास ने पुरूषों के समतुल्य बराबरी करने पीछे नहीं है।

विदित हो कि धमतरी जिला में स्वसहायता समूह की महिलाएं स्वरोजगार के प्रति सक्रियता के साथ भागीदारी निभा रही है जिनमें नगरी विकासखंड के समूहों से जुड़ी महिलाओं के माध्यम से उत्पादित हल्दी, मिर्च, निरमा, हार्पिक, साबुन, लिक्विड, सोयाबीन बड़ी, मशरूम, आचार मशरूम, धनिया, फिनाइल तैयार कर आदिमजाति कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, उद्यानिकी विभाग, वन विभाग एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल विकास योजना इन विभागों में सामान पहुंचाया जा रहा है। संबंधित विभागों से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रही है।

इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता गांधी ने बताया कि समूहों से निर्मित उत्पाद से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है। प्री मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास घुटकेल, अरौद, धमतरी, हटकेशर, बेलरगांव, बिरनासिल्ली, रिसगांव, भैंसामुड़ा, नगरी, शासकीय कन्या आश्रम बोरई, प्री मैट्रिक एकलव्य बालक छात्रावास पथर्रीडीह, अनुसूचित जनजाति कन्या आश्रम सिहावा, सांकरा, कमार बालक छात्रावास नगरी में सामग्री पहुंचाया जा रहा है।

जिससे महिला समूहों को शुद्ध रूप से राशि 54016 रूपये की आमदनी हुई है। आजीविका संवर्धन की दिशा में महिलाओं द्वारा यह अनूठा प्रयास किया जा रहा है। स्वरोजगार से महिलाओं का आत्म मनोबल बढ़ा हुआ है।

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