छत्तीसगढ़

झूठी है महिला पटवारी की शिकायत पुलिस कार्रवाई के खिलाफ ग्रामीण लामबंद

ऋषिकेश मुखर्जी

रायगढ़।

आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायगढ़ में उस समय माहौल काफी गर्म हो गया जब तकरीबन अस्सी की संख्या में महिलाएं और पुरुष ग्रामीण कार्यालय आ धमके। उन्होंने बताया कि विगत दिनों महिला पटवारी मीना सिदार हल्का नम्बर 25 तहसील खरसिया ग्राम सोनबरसा के द्वारा गांव के निर्दोष ग्रामीण युवकों हरिचरण गबेल व भागवत पटेल के विरुद्ध झूठी शिकायत देकर फंसाया है। इस घटना का विरोध करने एवं अपना पक्ष रखने के लिए वे सब आज जिला पुलिस अधीक्षक के कार्यालय में उपस्थित हुए हैं।

उनके कथनानुसार विगत दिनों महिला पटवारी सिदार ने ग्राम भेनापारा कोटवार के माध्यम से मुनादी करवाया गया तथा समीपस्थ ग्राम सोनबरसा में दूसरे दिन धान विक्रय के पंजीयन कार्य हेतु आवश्यक रूप से सुबह 9 बजे उपस्थित होने को कहा गया।जब निर्धारित समय मे ग्रामीण वहां पहुंच गए तब करीब तीन घण्टे विलंब से करीब 12 बजे सोनबरसा पहुंची महिला पटवारी से ग्रामीण युवक हरिचरण और भागवत ने इतनी देर से आने का कारण पूछ लिया तो बदमिजाज महिला पटवारी ने उसकी मर्जी वह जब आये तुम कौन होते हो पूछने वाले बोलकर हरिचरण को उन सबके सामने दो झापड़ मार दिया।

घटना को लेकर जब भागवत नाराज हुए तो महिला पटवारी ने दूसरे गांव के कुछ समर्थकों की सहायता से उन दोनों को दबाते हुए तुम लोगों को ज्यादा नियम कानून आता है,कहते हुए 112 नंबर में डायल कर घटना स्थल पर पुलिस को बुला लिया। इसके बाद झुठी शिकायत करते हुए दोनों निर्दोष लोगों को मेरे साँथ छेड़छाड़ करने और जातिगत गाली-गलौज करने की शिकायत करते हुए उन्हें फंसा दिया।

चुकी हम सब दूसरे गांव भेनापारा से सोनबरसा आये थे अतः हमारे विरोध को पुलिस और उस गांव के निवासियों ने नही सुना। इधर पुलिस ने महिला पटवारी की शिकायत पर पीड़ित ग्रामीणों पर धारा 294,506,354,354(क),354(ख)186,353,332 तथा 34 एवं 3(1-11)आदिवासी प्रताड़ना का मामला दर्ज कर उन्हें घटना स्थल पर ही गिरफ्तार करते हुए जेल भेज दिया।दूसरे दिन घटना का विरोध करने और सही जानकारी देने की नीयत से वे सब ग्रामीण एक जुट होकर रायगढ़ एस पी के पास आये है।उन्हें इसके बाद भी न्याय नही मिलने पर वे आंदोलन करने की बातें कहने लगे।

कुछ ही देर बात सभी ग्रामीण समाजिक कार्यकर्ता नरेश कंकरवाल के नेतृत्व में महात्मा गांधी चौक के पास जमा होकर उक्त महिला पटवारी और पुलिस प्रसाशन के विरुद्ध नारे बाजी करने लगे। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना था कि वे पूरी घटना के प्रत्यक्ष दर्शी है,बदमिजाज महिला पटवारी ने पहले ही ग्रामीणों से मारपीट की फिर उन्हें आदिवासी और महिला होने का बेजा लाभ लेते हुए झुठे मामले में बुरी तरह फंसा दिया। अब जब तक दोनो निर्दोष ग्रामीण जेल से छूट नही जाते एवं पुलिस पूरे घटना की निष्पक्ष जांच नही करते वे विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।

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