स्केलिंग ऑफ चाइल्ड प्रोटक्शन प्रोग्राम पर हुई कार्यशाला

स्केलिंग ऑफ चाइल्ड प्रोटक्शन प्रोग्राम पर हुई कार्यशाला

रायपुर । छत्तीसगढ़ पुलिस (अपराध अनुसंधान विभाग) और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधान में सिविल लाईन रायपुर में `स्केलिंग ऑफ चाइल्ड प्रोटक्शन प्रोग्राम इन छत्तीसगढ़ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई।
कार्यक्रम में पुलिस उप-महानिरीक्षक (अजाक) टी.आर. पैकरा ने कहा कि समाज के लिए बच्चों को मानवता का सर्वोत्तम उपहार माना गया है, जो कि अनभिज्ञ, आश्रित और संवेदनशील होते हैं। इसीलिए समाज में ये सभी के प्रिय माने जाते हैं। बच्चों का सर्वांगीण विकास अतिआवश्यक है। इन्हें विशेष देखभाल, सुरक्षा और उत्तम वातावरण की आवश्यकता होती है, क्योंकि ये देश के भविष्य होते हैं और भविष्य में समाज के लिए फलदायी होते हैं। बच्चे निश्छल और कोमल मन के होते हैं जिनके कारण हमारे भारतीय समाज में इन्हें भगवान का स्वरूप कहा जाता है। उन्होने कहा कि, इस प्रकार बच्चों और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए कार्य करना सीधे ईश्वरीय सेवा के समान है।

पुलिस की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया : छत्तीसगढ़ राज्य में पुलिस की ओर से यूनिसेफ के सहयोग से बच्चों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए कई नई पहल की गई है, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास विभाग आदि के समन्वय स्थापित कर कानून में दिए गए प्रावधानों के अनुसार बच्चों के अधिकारों की दिशा में कानूनी प्रावधान किए गए हैं। जिला पुलिस महासमुंद की ओर से एक सराहनीय पहल करते हुए बाल मित्र पुलिस थाना शुरु किया गया है, जिसके अनुरूप प्रत्येक जिले में बालमित्र पुलिस थाना को बाल हितैषी थाना बनाने में छत्तीसगढ़ पुलिस कार्य कर रही है।

वहीं जशपुर और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर राज्य पुलिस यूनिसेफ की सहयोग से पिछले छह सात सालों में बहुत ही अच्छा कार्य कर रही है। उन्होंने राज्य के सभी जिलों से आए पुलिस अधिकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस कार्यशाला में प्रशिक्षित होकर सभी पुलिस अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में बच्चों, अभिभावकों और उनके शिक्षकों को जागरूक करें। अधिक संवेदनशील और दक्ष बनाने का कार्य करें, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में मानव तस्करी और बाल तस्करी जैसे अपराधों पर पुलिस की ओर से प्रभावी रूप से नियंत्रण किया जा सकेगा।

कार्यक्रम में रेलवे पुलिस अधीक्षक पारूल माथुर ने कहा कि, बच्चों की सुरक्षा और ट्रैफिकिंग जैसे मामलों में रेलवे पुलिस की सतत् निगाह रहती है और इसकी रोकथाम के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। राज्य पुलिस की ओर से बच्चों और उनके माता-पिता औश्र शिक्षण संस्थाओं को जागरूक करने के उद्देश्य से `चेतना नाम से पुलिस प्रोग्राम चला रही है।

कार्यक्रम में सहायक पुलिस महानिरीक्षक सुजीत कुमार, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सचिव नंदलाल चौधरी, यूनीसेफ के जीवॉक चटर्जी, गार्गी साहा ने भी पुलिस अधिकारियों को बच्चों को जागरूक करने के विषय में और ट्रैफिकिंग रोकने के कानूनी और तकनीकी पहलूओं से अवगत कराया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जिलों से आए पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक पुलिस महानिरीक्षक पूजा अग्रवाल ने किया।

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