बच्चों के सर्वोत्तम हित के लिए आयोजित हुई कार्यशाला

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं बचपन बचाओ आंदोलन का संयुक्त आयोजन

छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के कार्यपालक अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय बिलासपुर के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा के निर्देश पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने बचपन बचाओ आंदोलन की राज्य ईकाई के साथ मिलकर किशोर न्याय अधिनियम एवं बाल श्रम के संबंध में एक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन रायपुर के हाॅटल ग्रैंड राजपूताना में किया। इस कार्यशाला में राज्य के विभिन्न जिलों से बाल अधिकारों के संबंध में कार्य करने वाले शासकीय विभाग, सामाजिक संस्थाएॅ एवं अधिकारीगण शामिल हुए। आज कार्यशाला के पहले दिन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव विवेक कुमार तिवारी, उपसचिव दिग्विजय सिंह, अवर सचिव श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव, एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के सचिव उमेश कुमार उपाध्याय सहित पांच अन्य जिलों के सचिव मौजूद रहे। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती प्रभा दुबे भी मौजूद रही।
कार्यशाला के पहले दिन किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए और इस अधिनियम के संबंध में अपनी अपनी भूमिका और दायित्वों के निर्वाह के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव विवके कुमार तिवारी ने बताया कि, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्य क्षेत्र में बालकों से संबंधित कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है और बालकों के सर्वोत्तम हित को प्राप्त करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण सदैव आगे बढ़कर कार्य कर रहा है। उन्होंने सभी उपस्थित व्यक्तियों से आग्रह किया कि, यदि बच्चों के संबंध में किसी तरह की विधिक सहायता या अन्य प्रकार की सहायता की आवश्यकता है तो संबंधित व्यक्ति निकटतम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से तुरंत संपर्क कर सकता है और प्राधिकरण अपनी ओर से ऐसे मामलों में यथासंभव प्रयास कर समस्या का समाधान कराएगा। इस दौरान उन्होंने नालसा द्वारा बच्चों के लिए संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी।

कार्यक्रम को बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती प्रभा दुबे बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक बी. संदीप राव, डाॅ.सोमा नायर, मनीष शर्मा एवं पुलिस विभाग, श्रम विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने भी सम्बोधित किया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के सचिव उमेश उपाध्याय ने उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए बताया कि, छ.ग. में माननीय उच्च न्यायालय एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बच्चों को लेकर अत्यंत संवेदनशीलता से कार्य कर रहा है। उन्होंने हाल ही में माननीय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा के द्वारा दिए गए एक आदेश का उल्लेख करते हुए बताया कि, उस मामले की गंभीरता को समझते हुए और बच्ची के हित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने इस आदेश में यह निर्देशित किया था कि बाल कल्याण समिति के आदेश से बालिका गृह में रखी गयी बच्ची को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष बच्ची के माता पिता को सौंपा जाएगा और सांैपे जाने के बाद सचिव स्वयं बच्ची के घर का भ्रमण कर उसकी सुरक्षा और उचित शिक्षा की व्यवस्था करवाना सुनिश्चित करेंगे। सचिव उपाध्याय ने बताया कि, यह अपनी तरह का बेहद संवेदनशील आदेश था जिसमें एक बच्ची की सुपुर्दगी उसके नैसर्गिक माता पिता को देने के साथ साथ उसकी सुरक्षा और उसकी शिक्षा का ध्यान रखा गया था।

कार्यक्रम में उपस्थित विषय विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न प्रतिभागियों के सवालों और समस्याओं का भी निराकरण किया गया।

दूसरे दिन यानि रविवार को होगी बाल श्रम पर चर्चा

कार्यशाला के दूसरे दिन बाल श्रम और इससे संबंधित विभिन्न विधिक सामाजिक और व्यावहारिक बिन्दूओं पर चर्चा होगी। इस चर्चा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर, बिलासपुर, बेमेतरा, राजनांदगांव, महासमुंद के सचिवों सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी शामिल रहेंगे। कार्यशाला का पहला दिन विभिन्न प्रतिभागियों की सवालों और जवाबों के नाम रहा और कई गंभीर और महत्वपूर्ण सवाल इस दौरान उठाये गये। बाल श्रम जैसे संवेदनशील विषय पर भी चर्चा में कई महत्वपूर्ण पहलूओं पर चर्चा की जाएगी।

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