रेकॉन्बीनैंट डीएनए टेक्नोलॉजी पर हुई कार्यशाला

गुरुकुल महिला महाविद्यालय में रेकॉन्बीनैंट डीएनए टेक्नोलॉजी पर बॉटनी डिपार्टमेंट द्वारा हुए सेमिनार में डॉक्टर सुनीता पात्रा ने बेसिक कॉन्सेप्ट्स, डीएनए वेक्टर ,प्लाज्मिड ,पीसीआर टेक्निक्स, विशेष रुप से डीएनए क्लोनिंग के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया की बॉडी के बाहर वेक्टर एंड पैसेंजर डीएनए का रेकॉन्बीनैंट होने पर इसे सेल में एंटर कर मल्टीपलीकेशन कराया जाता है।

जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा इंजेक्शन में DNA का एक्टिव पार्ट लेबोरेटरी में ही तैयार कर लिया जाता है। अब खून से सेपरेट करने की जरूरत नहीं है जेनेटिक इंजीनियरिंग विज्ञान की अत्याधुनिक ब्रांच है जिसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए बदलकर नया रुप दिया जा सकता है एवं इसके ज्यादा से ज्यादा फायदे लिए जा सकते हैं।

डॉ पात्रा ने बताया कि किस तरह रेकॉम्बिनेन्ट , डीएनए तकनीक का उपयोग कृषि क्षेत्र में प्रतिरोधक फसलें उगाने एवं क्षेत्र में उन्नत फसलों के लिए किया जा रहा है आजकल हजारों किस्में निकाली जा चुकी है जिनके अंदर बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित की जा चुकी है इस तरह पौधों को जेनेटिकली मॉडिफाइड करके विशेष उपलब्धियां रिसर्च में प्राप्त कर चुके हैं, बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी जेनेटिक इंजीनियरिंग एक बड़े रूप से कारगर सिद्ध हुई है ईकोलाई बैक्टीरिया की सेल को रेकॉम्बिंनेंट डीएनए का उपयोग कर मानवी इंटरफेरॉन बनाने के लिए शोध किये जा रहे है।

बायोटिक लेबोट्री में रिसर्च एनर्जी और एनवायरनमेंट से संबंधित एनीमल हसबेंडरी ,डेयरी फार्मिंग फार्मेसी, मेडिसिन आदि में जेनेटिक इंजीनियरिंग का विस्तृत इस्तेमाल आजकल हो रहा है डीएनए क्लोनिंग के द्वारा प्लांट में एवं पशुओं में कई जेनेटिकली मॉडिफाइड क्रॉप, बीटी बैगन, गोल्डन राइस ,ट्रांसजेनिक प्लांट जेनिटिक इंजीनियरिंग की ही देन है।

सेमिनार मैं सीएन्स परिषद डॉ वंदना अग्रवाल,अर्शिया खान,डॉक्टर अनुराधा गुप्ता,शुभांगी दुबे , डॉक्टर सीमा साहू उपस्थित थे।

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