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कोरोना संकट के बीच घर में रहकर मनाएं पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास और महत्व, पर्यावरण दिवस थीम

प्रकृति के बिना इस धरती पर किसी भी जीव-जंतु या मानव तक की कल्पना बेमानी है। इंसानों का प्रकृति से गहरा रिश्ता है। प्रकृति में थोड़ा भी बदलाव मानव की जिंदगी में बड़ा हेरफेर कर सकता है। इसके बावजूद आज इंसान ही पर्यावरण को हानि पहुंचाने में सबसे आगे है। यही कारण है कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बनाये रखने के लिए इस दिन को मनाने का फैसला किया गया।

World Environment Day 2020: विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास और महत्व

इस दिन को मनाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र की ओर से की गई थी और पहली बार इसे 1972 में मनाया गया। उसके बाद से लगातार 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता रहा है। ये साफ है कि पर्यावरण की वजह से ही इंसान और अन्य जीव-जंतुओं का जीवन आज संभव है।

यही कारण है कि दुनिया भर की सरकारें लोगों में पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक बनाने के लिए इस दिन को महत्व देती हैं। यह कोरोना संकट काल का भी समय है इसलिए जरूरी है कि आप अपने घर में ही रहकर इस दिन को मनाएं। साथ ही इस बात पर विचार करें कि पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए आप क्या योगदान दे सकते हैं।

World Environment Day 2020: पर्यावरण दिवस थीम

इस साल विश्व पर्यावरण दिवस का थीम Celebrate Biodiversity यानी जैव विविधता को रखा गया है। परंपरा के अनुसार हर साल विश्व पर्यावरण दिवस एक अलग देश द्वारा मनाया जाता है। ऐसे में इस बार पर्यावरण दिवस से जुड़े अहम कार्यक्रम कोलंबिया में आयोजित किए जाएंगे। इस बार के पर्यावरण दिवस की थीम के पीछे भी बड़ी अहम वजह है। देखा जाए तो यह इसका जुड़ाव हाल की कई घटनाओं से है।

ब्राजील के अमेजन वन क्षेत्र में भयंकर आग लगी, साथ ही संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग की बड़ी घटनाएं सामने आई। इसके अलावा, पूर्वी अफ्रीका समेत कई देशों में कई टिड्डीयों जैसे छोटे जीवों के आतंक और अब एक वैश्विक महामारी ने दिखाया है कि इंसान किस तरह इस पर्यावरण पर निर्भर है।

World Environment Day 2020: घर में रहकर मनाएं पर्यावरण दिवस

भारत में कोरोना संकट के कारण घर में रहना बेहतर है। ऐसे में घर में रहते हुए भी आप पर्यावरण के लिए बड़ा योगदान दे सकते हैं। कई ऐसी बातें हैं जिसका पालन कर आप पर्यावरण को रोज होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं।

– प्लास्टिक या पॉलिथीन का इस्तेमाल नहीं करें। हमेशा कपड़े की थैली का इस्तेमाल करें।
– चीजों को बार-बार इस्तेमाल करने के तरीके के बारे में सोचे। चीजों को रीसाइकल करने का गुण अगर आप सीखते हैं तो प्रकृति के दोहन से खुद को रोक सकेंगे।
– इस साल अपने घर के पास बाग-बगीचों में पेड़-पौधे लगाएं।
– नई पीढी को प्रकृति, पर्यावरण का महत्व समझाएं।

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