बस्तर में 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे का हुआ आगाज

बस्तर।

बस्तर जिले में 75 दिनों तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की शुरुआत शनिवार से पाट जात्रा रस्म से की गई है।
जगदलपुर के दंतेश्वरी मंदिर के प्रागंण में बस्तर दशहरा में चलने वाले रथ के लिए गांव बिरोली से लकड़ी लाया गया। जिसके बाद पूरे विधि-विधान से लकड़ी की पूजा अर्चना की गई।

बिराली के जंगल की लकड़ी जो साल की लकड़ी कहलाती है जिसे बस्तरिया जुबान में ठोरलू खोटला कहा जाता है उसे इस विधान से एक दिन पहले लाया गया. फिर पूरे विधि विधान के साथ इस लकड़ी की पूजा की गई. इस पूजा विधान में बस्तर दशहरा समिति के मांझी चालकी सहित दशहरा समिति के अध्यक्ष सांसद दिनेश कश्यप और समिति के सचिव तहसीलदार की अगुवाई में पूजा विधान को सम्पन्न किया गया. इस पूजा विधान के साथ ही शनिवार से बस्तर दशहरा शुरू हो गया.

दशहरा की समाप्ति तक होने वाले लगभग एक दर्जन से ज्यादा पूजा विधान बस्तर दशहरें का हिस्सा होंगे. अब 22 सिंतमबर को डेरी गढ़ाई की रस्म के साथ ही विशालकाय दो मंजिला रथ का निर्माण शुरू हो जाएगा.

ये रथ नवरात्रि से दंतेश्वरी मंदिर की हर दिन परिक्रमा करेगी।
लगभग 600 साल से चली आ रही इस परंपरा को आज भी बस्तर के लोग धूमधाम से मनाते आ रहे है. इस दशहरा पर्व को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक हर साल बस्तर पहुंचते है।

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