पाकिस्तान को 25 करोड़ डॉलर की मदद रोकेगा अमेरिका

अमेरिका की बार-बार की चेतावनी के बावजूद हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई न करना पाकिस्तान को भारी पड़ सकता है। आतंकियों और उनके संगठनों के खिलाफ पाकिस्तान के नरम रवैये से नाराज अमेरिका उसे 25.5 करोड़ डॉलर (लगभग 16 अरब रुपये) की सहायता पर रोक लगा सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में पाकिस्तान को मदद रोकने के मुद्दे पर अंदरूनी बहस छिड़ी हुई है। अगर वित्तीय मदद रोकने की घोषणा होती है तो यह साबित होगा कि ट्रंप आतंकरोधी अभियानों में पाकिस्तान के ढुलमुल रवैये के लिए उसे दंड देने की अपनी चेतावनी को लेकर गंभीर हैं।

मालूम हो कि जब से ट्रंप ने पाकिस्तान को आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह घोषित किया है, तब से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव चल रहा है।

वर्ष 2002 से अब तक पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर (लगभग 1300 अरब रुपये) की वित्तीय सहायता दे चुके अमेरिका ने इस साल अगस्त में उसे 25.5 करोड़ रुपये की मदद रोकने की घोषणा की थी।

अमेरिका ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक उसे यह मदद नहीं दी जाएगी। ट्रंप प्रशासन आने वाले हफ्तों में इस बारे में आखिरी फैसला करने वाला है। मालूम हो कि जुलाई में अमेरिका रक्षा विभाग ने भी पाक को पांच करोड़ डॉलर की मदद रोक दी है।

हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को लेकर काफी सख्त रवैया अपनाया है। पिछले हफ्ते राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का ऐलान करते हुए ट्रंप ने कहा था कि हम हर साल पाकिस्तान को भारी वित्तीय मदद देते हैं और इसके बदले में उसे हमारी मदद करनी होगी।

क्रिसमस से ठीक पहले उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने अफगानिस्तान के औचक दौरे में भी पाकिस्तान को याद दिलाया था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उसे अल्टीमेटम दे दिया है। अगर पाकिस्तान कुछ नहीं करता है तो अमेरिका उसकी धरती से आतंकियों का सफाया करने के लिए एकतरफा कार्रवाई भी कर सकता है।

बंधकों की रिहाई के बाद बढ़ी रिश्तों में खटास

इस साल अक्तूबर में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पिछले पांच साल से बंधक बनाई गई एक अमेरिकी महिला, उसके कनाडाई पति और बच्चे को हक्कानी नेटवर्क के कब्जे से छुड़ाया था।

इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने हक्कानी नेटवर्क के एक आतंकी को भी दबोचा था। अमेरिका ने उस आतंकी को अपने कब्जे में देने की मांग की जिसे पाकिस्तान ने ठुकरा दिया। इस घटना के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में खाई और बढ़ी है।

गैर नाटो मित्र देश का दर्जा भी खतरे में

इस साल फरवरी में अमेरिका में पाक के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की वरिष्ठ निदेशक लीजा कर्टिस ने ट्रंप प्रशासन को सलाह दी थी कि वह पाकिस्तान को अपना दोस्त मानना बंद कर दें।

यही नहीं, अगर पाकिस्तान उसके आतंकरोधी लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता नहीं दिखाता है तो उसे दिए गए गैर नाटो मित्र देश का दर्जा भी छीन लिया जाना चाहिए। यह कदम पाक को 25.5 करोड़ डॉलर की मदद रोकने से ज्यादा असरदार होगा क्योंकि ऐसी स्थिति में उसके लिए सैन्य उपकरण हासिल करना मुश्किल हो जाएगा।

पाक ने एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ आगाह किया

<>पाक सेना ने दोटूक लहजे में अमेरिका को उसकी धरती पर आतंकवादियों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई को लेकर आगाह किया है। सैन्य प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने इस बात से इनकार किया कि पाकिस्तान आतंकियों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।<>

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