उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र के नए प्रतिबंध, पैदा होगा बड़ा तेल संकट

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाते हुए उसकी तेल आपूर्ति रोक दी है। इसके अलावा विदेशों में काम कर रहे उत्तर कोरियाई लोगों को उनके देश लौटने के आदेश दिए हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाते हुए उसकी तेल आपूर्ति रोक दी है। इसके अलावा विदेशों में काम कर रहे उत्तर कोरियाई लोगों को उनके देश लौटने के आदेश दिए हैं।

यह एक बड़ा फैसला है जो न केवल उत्तर कोरिया में तेल संकट खड़ा कर सकता है बल्कि आर्थिक दबाव बनाकर उसे दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग भी किया जा सकता है।

अमेरिका द्वारा प्रस्तावित इन प्रतिबंधों का किसी ने भी विरोध नहीं किया और यह 15-0 से स्वीकृत हो गया। सुरक्षा परिषद में सर्वसम्मति से पारित इस प्रस्ताव में उत्तर कोरिया को ईंधन आपूर्ति और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में बेतहाशा कटौती कर दी गई है।

इसके तहत उत्तर कोरिया के लिए डीजल व केरोसिन समेत करीब 89 फीसदी रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगेगा। इस कारण उत्तर कोरिया में पेट्रोलियम पदार्थों का जबरदस्त संकट पैदा हो सकता है।

ये प्रतिबंध पूर्व प्रतिबंधों की तुलना में काफी सख्त हैं, जिसमें साल भर के भीतर विदेशों में काम कर रहे करीब एक लाख उत्तर कोरियाई कामगारों के प्रत्यावर्तन की मांग व प्योंगयांग के लिए खाद्य उत्पादों, मशीनरी, लकड़ी, विद्युत उपकरण और पत्थर का निर्यात भी रोकना शामिल है।


हालात नियंत्रण से बाहर जा रहे थे : चीन

अमेरिका द्वारा रखे गए इस प्रस्ताव का समर्थन उत्तर कोरिया के समर्थक देश चीन और रूस ने भी किया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने इस प्रस्ताव पर चीन के सहयोग की सराहना करते हुऐ कहा कि ऐसा करने से उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।

इस अमेरिकी प्रस्ताव के पक्ष में उत्तर कोरिया का साथ देने वाले रूस ने भी मतदान किया, जबकि उत्तर कोरिया पर अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र के कई और प्रतिबंध प्रभावी हैं।

हेली ने कहा कि इससे उत्तर कोरिया को संदेश दिया गया है कि यदि वह आगे भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो उसे और दंडित और अलग-थलग किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने परिषद के प्रस्ताव का स्वागत किया है।

इन नए प्रतिबंधों में सबसे प्रमुख बात यह रही कि उत्तर कोरिया के समर्थक देश चीन और रूस भी सुरक्षा परिषद के साथ रहे।

प्रतिबंधों के समर्थन में चीन के उतरने का सीधा अर्थ है कि उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग-उन पर इसका असर पड़ेगा। चीन के उप राजदूत वू हेताओ ने कहा कि हालात नियंत्रण से बाहर जा रहे थे और खतरा बढ़ रहा था।

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