‘रोहिंग्या महिलाओं के स्तन और जननांगों पर दांतों से काटने के निशान’

बांग्लादेश: शरणार्थी कैंप में रह रहीं शामिला जब अपने साथ हुए गैंगरेप को याद करती हैं तो आज भी सिहर उठती हैं।

शामिला ने बताया कि कैसे म्यांमार के सैनिक उनके घर में जबर्दस्ती घुसे और बच्चों के सामने उनके साथ गैंगरेप किया।

स्थिति यह है कि उनका शरीर भी अब तक इस हमले से उबर नहीं पाया और उन्हें अब तक ब्लीडिंग हो रही है।

यह कहानी अब बांग्लादेश के हर रेफ्यूजी कैंप में सुनी-सुनाई जा रही है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षकों के मुताबिक उन्होंने हाल ही में म्यांमार की हिंसा के बाद ऐसे कई रोहिंग्या रेप और गैंगरेप पीड़ित देखे हैं जो कि भागकर बांग्लादेश पहुंचे हैं।

इनमें से अधिकांश ने यही बताया कि इस दुष्कर्म को अंजाम देनेवाले और कोई नहीं बल्कि म्यांमार के सैनिक हैं।

शामिला (बदला हुआ नाम), बताती हैं कि वह तीन दिन तक पैदल चलने के बाद बांग्लादेश पहुंची हैं।

आंसुओं से भरी आंखों के साथ अपनी 6 साल की बेटी का हाथ कसकर पकड़ते हुए शामिला ने कहा, ‘तीन सैनिकों ने मेरे साथ रेप किया।’

शामिला ने आगे बताया, ‘जब वे लोग चले गए तब मैं अपने दो बच्चों के साथ उस भीड़ के पीछे चल पड़ी जो अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।

‘ जब शमिला पर हमला हुआ तब उनके पति घर पर नहीं थे, और उसके बाद से शमिला ने अपने पति को नहीं देखा है।

शमिला को यह भी नहीं पता कि उनके बाकी 3 बच्चे कहां हैं क्योंकि जिस वक्त सैनिक उनके घर में घुसे वे बच्चे बाहर खेल रहे थे और बाद में वे बच्चे कहीं नहीं दिखे।

25 साल की शमिला अब बांग्लादेश के रेफ्यूजी कैंप में रह रही हैं। यूएन ऑब्जर्वर्स के मुताबिक शमिला की तरह ही अन्य रोहिंग्या महिलाएं-बच्चियां 25 अगस्त को शुरू हुई हिंसा के बाद यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं।

पीड़ितों नें खुद बताया है कि कैसे एक विशेष समुदाय को भागने के लिए मजबूर करने को यौन हिंसा को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

बीते दशकों में हजारों रोहिंग्या रखाइन छोड़कर भागे हैं लेकिन हाल की हिंसा के बाद तो 4 लाख 29 हजार रोहिंग्या भागने पर मजबूर हुए हैं।

बांग्लादेश के डॉक्टर्स का कहना है कि अब रेप पीड़िताएं उनके पास पहुंचने की हिम्मत कर पा रही हैं।

हैरान कर देने वाली बात यही है कि इन सभी पीड़िताओं की कहानी लगभग एक सी है। जैसे सैनिक उनके घरों में जबर्दस्ती घुसते हैं जब उनके पति या अन्य पुरुष घर पर न हो और उनके बच्चों के सामने रेप करते हैं।

यूएन माइग्रेशन एजेंसी की तरफ से चलाए जा रहे क्लिनिक में काम करने वाली नूरीन तस्नूपा कहता हैं कि अधिकांश रेप पीड़िताओं को बलात्कार से पहले मारा-पीटा गया है।

नूरीन ने बताया कि उन्होंने इन पीड़िताओं के शरीर पर चोट के नीले निशान और स्तन और जननांगों पर दांते से काटने के निशान देखे हैं।

नूरीन कहती हैं कि अब ये महिलाएं अपने साथ हुई विभत्स घटनाओं के बारे में बोल रह हैं, वरना लोग इन घटनाओं को बेइज्जती के डर से किसी से साझा तक नहीं करते।

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