चिंताजनक स्थिति – देश की आधी महिलाएं एनिमिया की शिकार

नई दिल्ली। किसी भी देश के लिए विकास के लिए जरूरी है कि वहां के नागरिक स्वस्थ्य हों। लेकिन ग्लोबल न्यूट्रीशन रिपोर्ट 2017 पर गौर करें, तो देश की 51 फीसदी 18 से 49 वर्ष उम्र की महिलाएं खून की कमी (एनिमिया) की शिकार हैं। ऐसे में इन महिलाओं के होने वाले बच्चों के भी कमजोर होने का खतरा बना हुआ है।

चिंताजनक स्थिति
– 20 फीसदी प्रसव के दौरान जच्चा की मौत की वजह खून की कमी
– 50 फीसदी अन्य मौतें भी एनिमिया के कारण होने वाली बीमारियों से
– कम वजन के बच्चों के जन्म की वजह भी मां का एनिमिया ग्रस्त होना है

खून की कमी की वजह
– आहार में पौष्टिक तत्वों खासतौर पर आयरन की कमी
– स्वच्छता की कमी भी एनिमिया की एक बड़ी वजह है

अर्थव्यवस्था पर भी भारी
– 1.58 लाख करोड़ रुपए की चपत अर्थव्यवस्था को 2016 में लगी एनिमिया की वजह से
– 3 गुना थी यह राशि 2017-18 के केंद्रीय स्वास्थ्य बजट 48,878 करोड़ रुपए के मुकाबले

अबतक के प्रयास
– 1970 में एनिमिया से मुक्ति के लिए सरकार ने नेशनल एनिमिया प्रोफलैक्सिस प्रोग्राम चलाया। इसके तहत 1 से 5 साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को आयरन की गोलियां वितरीत की गई।
– 1991 में सरकार ने योजना का नाम बदलकर नेशनल न्यूट्रिशनल एनिमिया कंट्रोल प्रोगाम रखा। इसमें गर्भवती महिला और पांच साल तक के बच्चे की सेहत के लिए पोषाहार की व्यवस्था की गई।
– 2013 में साप्ताहिक आयरन व फॉलिक एसिड पूरक आहार (डब्ल्यूआईएफएएस) कार्यक्रम शुरू किया गया। इसका मकसद किशोरों में खून की कमी को रोकना था।

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