मौतों का गलत आंकड़ा: कोरोना काल में 328 मौतें छिपाईं नगर निगम अफसरों ने, अर्थदंड सिर्फ 50 रुपए

ब्युरो चीफ : विपुल मिश्रा संवाददाता : राधिका पाखी

बिलासपुर. आपको यह जानकर हैरानी होगी, कोरोना काल में नगर निगम के जिन अधिकारियों ने बिलासपुर में कोरोना से हुई 328 मौतों का आंकड़ा छिपाया। उनके ऊपर सरकार ने सिर्फ 50 रुपए का अर्थदंड लगाकर उन्हें छोड़ दिया है। मौतों की जानकारी छिपाने में लापरवाही की हद देखिए। राज्य सरकार के पोर्टल में मौतों से जुड़ी अलग जानकारी।

केंद्र को दूसरी सूचना। कुल मिलाकर दोनों ही सरकार को झूठी जानकारी भेजी गई। योजना एवं सांख्यिकी विभाग ने डेटा चेक किया तो इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। उन्होंने तत्काल नगर निगम अधिकारियों को नोटिस भेजा। स्पष्टीकरण मांगा। जो अधिकारी जिम्मेदार थे, उन्होंने तो हद यह कर दी कि इसे पोर्टल की गलती बताकर माफ करने का आवेदन भेज दिया है।

नगर निगम के अधिकारियों द्वारा केंद्र सरकार को कोरोना से हुई मौतों की झूठी जानकारी भेजने का खुलासा हुआ है। बिलासपुर में जनवरी से जुलाई महीने में जो डेटा केंद्र सरकार को भेजा गया है, उनमें 328 मौतों का कोई रिकॉर्ड दर्ज ही नहीं किया गया है।
इसी तरह इन्हीं महीनों में 1510 बच्चों का जन्म अधिक होना बताया गया है। जबकि ऐसा नहीं हुआ है। भारत सरकार ने जन्म और मृत्यु दर की जानकारी के लिए रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) पोर्टल तैयार किया है। इसमें ही राज्य या जिलों की जन्म और मृत्यु से संबंधित जानकारियां अधिकारी अपडेट करते आ रहे हैं।

जन्म और मौत को छुपाने निगम अधिकारियों ने क्या किया

1510 का जन्म, 7 हजार 395 की मृत्यु, बाद में जोड़ी
कोरोना के जिस दौर यानी जनवरी से जुलाई के सात महीने में 7 हजार 905 बच्चों का जन्म हुआ है। वहीं 5 हजार 395 लोगों की मृत्यु हुई है। नगर निगम ने यह डेटा भी उसी एमआईसी और आरजीआई पोर्टल में अपलोड किया है। जिसमें गड़बड़ी के चलते निगम अधिकारियों को फजीहत झेलनी पड़ रही है। हालांकि उस दौर में मृत्यु का यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। क्योंकि जानकार बताते हैं कि बिलासपुर में इतनी संख्या में लोगों की मौतें कभी नहीं हुई।

फंसने के बाद निगम ने राज्य सरकार को लिखा

सरकार ने जन्म मृत्यु की जानकारी गलत भेजने की गड़बड़ी जब पकड़ ली तब यहां के अधिकारियों ने एक चिट्‌ठी चलाई। इसमें ही यह बताया गया है कि आरजीआई पोर्टल में डाटा एंट्री ऑपरेटरों को प्रदत्त आईडी में एड ओल्ड रजिस्टर्ड बर्थ और एड न्यू बर्थ अथवा एड न्यू बर्थ इंवेंट का ऑप्शन ही नहीं है। यह चिट्ठी सात महीने बाद लिखी गई है, जबकि सामान्य बात है कि परेशानी तो तब रही होगी जब इस पोर्टल की लांचिंग हुई।

बताया- पोर्टल में जन्म-मृत्यु का विकल्प नहीं

राज्य सरकार ने स्थानीय तौर पर इसके लिए एमआईएस एंटी करने की व्यस्था दी है। यह भी एक पोर्टल है, जिसमें दोनों तरह की जानकारी दी जा रही है। इसकी निगरानी का काम छत्तीसगढ़ में मुख्य संचालक आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय से किया जा रहा है। बिलासपुर में जन्म और मृत्यु के संदर्भ में इस अंतर की गड़बड़ी को यहां के अधिकारियों ने पकड़ा है। जिसके बाद निगम अधिकारियों ने सफाई दी।

श्मशान में हुई मौतों की जानकारी अपडेट नहीं होने के कारण हुई थी दिक्कत

कोरोना के दौर में जो मौतें श्मशान में हुई थी उसे एमआईएस और आरजीआई पोर्टल में अपडेट नहीं किया गया था। इसके अलावा जो जन्मदर ज्यादा दिख रहा है उसकी वजह पोर्टल में पुराने जन्मदर को चढ़ाने का विकल्प नहीं था, जिसके कारण वह ज्यादा चढ़ गया और दिखने लगा। अब सब कुछ सुधर गया है। कहीं कोई परेशानी नहीं है। मुझे 50 रुपए का जुर्माना लगा है। -डॉ. ओंकार शर्मा, रजिस्ट्रार (जन्म मृत्यु), नगर पालिक निगम, बिलासपुर

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