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यदुपति सिंहानिया का हुआ निधन, क्रिकेट के पितामह के रूप में थी पहचान

देशभर में वह क्रिकेट के विकास व प्रोत्साहन के लिए जाने जाते थे। उनके निधन पर क्रिकेटरों व क्रिकेट प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।

कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट को विश्व फलक पर पहुंचाने के लिए जेके परिवार के यदुपति सिंहानिया का अहम योगदान रहा। उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) के अध्यक्ष रहे यदुपति सिंहानिया का गुरुवार सुबह सिंगापुर में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 67 साल के थे। देशभर में वह क्रिकेट के विकास व प्रोत्साहन के लिए जाने जाते थे। उनके निधन पर क्रिकेटरों व क्रिकेट प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई।

वर्ष 2015 में डॉ. गौरहरि सिंहानिया के निधन के बाद यूपीसीए में रिक्त हुए अध्यक्ष पद पर उनके बेटे यदुपति की ताजपोशी की गई थी। उस समय यूपीसीए के सचिव रहे राजीव शुक्ला की मौजूदगी में यूपीसीए की कार्यकारिणी की बैठक में यदुपति के नाम पर मुहर लगी थी। खेल के प्रति लगाव व क्रिकेट को बढ़ावा देने की मंशा उन्होंने पदभार ग्रहण करते ही दिखा दी थी। वह पिता के क्रिकेट को नए आयाम देने के मकसद को और आगे बढ़ाने की बात को लगभग हर मंच से कहते थे।

निरीक्षण कर परखते थे मैच की तैयारी

यूपीसीए के निदेशक प्रेम मनोहर गुप्ता ने बताया कि खेल के प्रति उनका लगाव मैच से पहले होने वाली तैयारियों के दौरान देखने को मिलता था। वह पूरी तत्परता से हर व्यवस्थाओं की जानकारी लेते थे। ग्रीनपार्क में भारत व न्यूजीलैंड के बीच खेला गया ऐतिहासिक 500वां टेस्ट मैच और फटाफट क्रिकेट आइपीएल में उनकी सक्रियता देखने लायक थी।

खेल के विकास को देते थे प्रमुखता : खेल के विकास पर होने वाली मीटिंग में जुड़कर क्रिकेट को बढ़ावा व बेहतर सुविधाओं के लिए यदुपति हमेशा तत्पर रहते थे। वह खिलाडि़यों को संवारने के लिए कमला क्लब क्रिकेट अकादमी में कई विदेशी खिलाडि़यों को प्रशिक्षण देने के लिए बुलाते थे। हाल में वेस्टइंडीज के महान तेज गेंदबाज कर्टनी वॉल्श उनकी पहल पर ही कमला क्लब में कई दिनों का प्रशिक्षण देने के लिए आए थे।

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