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यश बिरला – चमकते आसमान का एक टूटता सितारा

कारोबार की दुनिया में बिड़ला ग्रुप एक जाना-माना नाम

एक नव वयस्क युवक जो किसी देश में आराम से पढ़ाई कर रहा है, अचानक से उसे खबर मिलती है कि उसके माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य एक वायु दुर्घटना में नहीं रहे है। इस खबर के साथ ही वो नवयुवक एक बहुत बड़े सदमें में आ गया। उसे विदेश में अपनी पढ़ाई को बीच में ही छोड़ कर वापस अपने घर आना पड़ा। और एक बार जो वो अपने कारोबार में उलझा तो फिर कभी उसने पढ़ाई और अपने पुराने जीवन की ओर मुड़कर नहीं देखा।

सुनने में यह काफी कुछ हद तक एक फिल्मी पटकथा के जैसा लगता है। यह पटकथा जैसा लगता जरुर है परन्तु यह कोई पटकथा नहीं है। यह एक राजसिक समान एक बड़े कारोबारी के बेटे की जीवन कथा है। जिसे हम सभी यश बिरला के नाम से जानते है।

मनहूस फोन कॉल

14 फरवरी, 1990 की सुबह सुबह की वो मनहूस फोन कॉल यश कभी नहीं भूल सकता, जिस काल ने उसका सारा जीवन बदल कर रख दिया था। इसी काल से उसे खबर मिली थी कि एक ही पल में उसने अपने पिता, मां और बहन को खो दिया था, और इसी के साथ वो इस दुनिया में एक बार फिर से अनाथ हो गया था।

कुमार मंगलम के पिता आदित्य विक्रम बिड़ला

कारोबार की दुनिया में बिड़ला ग्रुप एक जाना-माना नाम है। टाटा ग्रुप के समान इस ग्रुप को भी भारती अर्थव्यवस्था का एक मजबूत पिलर का नाम दिया जा सकता है। कुमार मंगलम के पिता आदित्य विक्रम बिड़ला ही पहले यश के पिता का कारोबार देखा करते थे। यह बात यश ने अपनी किताब आन ए प्रेयर में स्पष्ट रुप से लिखा है। पिता आदित्य विक्रम बिड़ला की मृत्यु के समय यश ने उनकी संपत्ति पर अपना दावा जताया था।

एक बार को सोच कर देखिए कि जिस युवक ने अभी अभी 18 साल की आयु में कदम ही रखा हो, और उसे कुछ कम्पनियों का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स बना दिया जाए तो उसके खेलने-कूदने, और मस्ती के दिन कहां बाकि रह गए होंगे।

पर उम्र तो उम्र है साहेब, जिम्मेदारियों का लबादा लाद देने से कोई जिम्मेदार नहीं हो जाता। उम्र का तकाजा था कि वो अपने 20वें जन्मदिन को अपने फ्रेंड्स के साथ मनाने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग को बीच में छोड़कर चले गए थे। जिसके लिए बाद में उन्हें समझाया भी गया कि यह सही नहीं था।

1991 में विवाह सूत्र में बंध गए दोनों

यश और महाराष्ट्रियन अवंति दोनों का प्रेम अमेरिका के कालेज के दिनों का था। समय के साथ दोनों का प्रेम परवान चढ़ा और दोनों 1991 में विवाह सूत्र में बंध गए। आज दोनों के तीन बेटे है, श्लोक, वेदांत और निर्वाण।

योगा और आयुर्वेद में विशेष आस्था

यश चाहे स्वयं किसी भी प्रकार की जीवन शैली को फोलो करते हो, परन्तु उन्होंने अपने बच्चों के नाम एक दम आध्यात्मिक रखें है। यश और उनकी जीवन संगनी योगा का सख्ती से पालन करते है। यश और अवंति दोनों को योगा और आयुर्वेद में विशेष आस्था रही है। यही वजह है कि आज भी बिड़ला ग्रुप के बाद एक केरल वैद्यशाला है।

यह तो था यश बिड़ला का संक्षिप्त परिचय, वर्तमान में यश बिड़ला अपने कारोबार या व्यापार ग्रुप को लेकर सुर्खियों में नहीं है। स्विस बैंक में खाता रखने के मामलें में इनका नाम आने के बाद खबरों में इन्हें देखा जा सकता है। इससे कुछ वर्ष बात कुमार मंगलम बिड़ला का नाम एक बार कोयला घोटाले में जब आया था जो सारी मीडिया में एक तरह का हड़कम्प मच गया था।

उस समय किसी ने इस बात पर यकीन नहीं किया था। लेकिन आज की परिस्थितियां उस समय की परिस्थितियों से एक दम विपरीत है। नौजवानी के दिनों में यश बिड़ला की जीवन शैली एक आधुनिक जीवन शैली थी।

यश आज के आधुनिक नौजवनों की तरह देर रात तक पार्टीज में रहना, डिस्को, क्लब और पेज थ्री पर्सनैलिटी के रुप में जाने जाते थे, उनकी जीवन शैली को देखते हुए, जब उनके बारे में इस प्रकार की खबरें सामने आती है तो हम एक बार को यकीं कर लेते है।

मुंबई में सबसे महंगा खंड

आज यश बिड़ला बिड़ला हाउस में रहते हैं। इसका निर्माण उनके परदादा, रामेश्वर दास ने 1930 के दशक में किया था। अपने समय में महात्मा गांधी अक्सर यहां रहते थे। बिड़ला हाउस मालाबार हिल्स में दो एकड़ में फैला हुआ है, जो पूरे मुंबई में सबसे महंगा खंड है।

यश अपनी दादी से धर्म और आध्यात्म की कहानियां सुनकर बड़े हुए है। यहां तक की आज वो उपनिषाद जैसे पुराने धार्मिक ग्रंथ भी पढ़ते हैं। प्राणायाम ध्यान करते हैं, और हिमालय की लगभग हर तीर्थ यात्रा पर जाते है।

धार्मिक नेताओं से मिलते है। उनसे बहुत कुछ सीखते है। जादू, चमत्कार और ज्योतिष जैसी विद्याओं को लेकर उनके मन में कुछ जिज्ञासाएँ हैं लेकिन वो इनके प्रभाव में नहीं है।

विजया माल्या के विलफुल डिफाल्टर घोषित होने के बाद इसी श्रंखला में 16 जून 2019 को यश बिड़ला का नाम आया है। विल्फुल डिफाल्टर से अभिप्राय: ऐसे डिफाल्टर से माना जाता है जो धन होते हुए भी अपने कर्जे नहीं चुकाता है।

बैंको और वित्तीय संस्थानों के रड़ार पर यश

विलफुल डिफाल्टर घोषित होने के बाद से ही यश भी बैंको और वित्तीय संस्थानों के रड़ार पर है। सुरक्षा एजेंसियां इनके धन की जांच कर रही है। स्थिति यह है कि मुंबई के इनके घर पर प्रतिमाओं के द्वारा आगंतुकों का स्वागत तो किया जाता है परन्तु आने वालों को गेट से ही लौटा दिया जाता है।

आर्थिक अपराध शाखा की कई एजेंसियां इनके वित्तीय जांच में लगी हुई है। मामले अभी अदालतों में चल रहे है। यह खबर हैरान कर देने वाली है कि जिस बैंक की आधारशिला परदादा ने रखी थी, आज उसी बैंक ने यश को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर दिया है।

यश बिड़ला की साख पर प्रश्न चिंह

बिड़ला सूर्या लिमिटेड द्वारा 67 करोड़ रुपये ना चुकाने के आरोप के चलते यश ग्रुप की इस कम्पनी और यश बिड़ला की साख पर प्रश्न चिंह आ गया है। बैंक के अनुसार कम्पनी ने 100 करोड़ रुपये की क्रेडित लिमिट ली हुई थी, इसका 67 करोड़ का ब्याज नहीं दिया गया है।

कम्पनी ना तो कर्ज चुकाने की स्थिति में हैं और ना ही ब्याज। एक बार यश पर नशीली ड्रग्स रखने के भी आरोप लग चुके है। जून 2013 को इनके खिलाफ यूको बैंक ने केस फाईल किया और इन्हें 16 जून 2019 को इन्हें विल्फुल डिफाल्टर घोषित कर दिया गया।

आज के समय में यह स्थिति इनके साथ क्यों बनी। इसका विश्लेषण आज हम इनकी कुंडली से करने जा रहे है-

यश बिड़ला कुंडली विश्लेषण
नोट – (जन्म समय के अभाव में चंद्र राशि का अध्ययन किया जा रहा है)
29 सितम्बर 1967, मुंबई, भारत

यश बिरला की कुंडली कर्क राशि की है। गुरु-शुक्र सिंह राशि, सूर्य कन्या राशि, बुध-केतु तुला राशि, मंगल स्वराशि वृश्चिक राशि, शनि मीन राशि और राहु मेष राशि में स्थित है।1990 से इनका जीवन बदलना शुरु हुआ।

जब अचानक से इन्होंने वायु दुर्घटना में अपने परिवार को खो दिया। जिस समय यह घटना घटी उस दिन चंद्रमा कन्या राशि, मंगल, शुक्र और शनि धनु राशि, बुध-राहु मकर राशि, सूर्य कुम्भ राशि, गुरु मिथुन राशि और केतु कर्क राशि में गोचरस्थ था।

गोचर में चतुर्थ भाव और चतुर्थेश, अष्टम भाव पर वक्री गुरु का दृष्टि प्रभाव था। चतुर्थेश शुक्र मंगल-शनि के साथ छ्ठे भाव में होने के कारण बुरी तरह पीडित था। शनि अष्टमेश था और चतुर्तेश के साथ होकर राशिश चंद्र को अपनी दशम दृष्टि से पीडित कर रहा था। इसके साथ ही शनि की तीसरी दॄष्टि अष्टम भाव और पिता कारक सूर्य पर भी थी। इस प्रकार इस दिन गोचर में अनेक अशुभ योग बन रहे थे।

विवाह कारक गुरु की सप्तम दॄष्टि

2, मार्च 19901 में यश का विवाह अवंति से हुआ। इस दिन इनके सप्तम भाव पर शनि का गोचर और विवाह कारक गुरु की सप्तम दॄष्टि थी। विवाह सूत्र में बंधने में ये दोनों ग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।

जून 2013 में यूको बैंक ने इनके खिलाफ कर्जा ना चुकाने का केस फाईल किया उस समय इनकी शनि इनकी जन्म राशि से चतुर्थ भाव पर गोचर कर रहे थे, शनि ढ़ैय्या की इस अवधि से इनकी परेशानियां बढ़नी शुरु हुई।

जो 16 जून 2019 को इन्हें विलफुल डिफाल्टर घोषणा तक लेकर आ गई। इनकी जीवन यात्रा और जीवन परेशानियों की एक खास बात यह है कि इनकी जीवन में धनु के शनि की भूमिका बहुत खास रही।

माता-पिता और बहन के प्लेन क्रेस में मृत्यु होने के समय भी शनि धनु राशि में था, और इस समय जब ये विलफुल डिफाल्टर घोषित हो गए हैं, आज की समय में भी शनि धनु राशि में ही गोचर कर रहा है।

2020 में शनि गोचर में मकर राशि में गुरु के साथ गोचर

इस २९ साल के अंतराल ने इनके जीवन को एक बार फिर से उसी तकलीफ और परेशानी की स्थिति में ला खड़ा किया है। 2020 में शनि गोचर में मकर राशि में गुरु के साथ गोचर करेंगे उस समयइनकी परेशानियों में कुछ कमी होने और इनके संभलने के योग बन रहे है। राहु इनके द्वादश भाव पर गोचर कर रहे है, संभव है ये विदेश गमन कर जायें।

ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव 8178677715, 9811598848

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