उत्तर प्रदेश

योगी को दलित मित्र अवॉर्ड, अंबडेकर महासभा के फैसले का विरोध शुरू

पहले डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम के साथ डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर जोड़े जाने फिर एससी-एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर दलित समुदाय मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी से पहले ही नाराज चल रहा है

लखनऊ।

पहले डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम के साथ डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर जोड़े जाने फिर एससी-एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर दलित समुदाय मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी से पहले ही नाराज चल रहा है अब अंबेडकर महासभा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को ‘दलित मित्र’ अवॉर्ड से सम्मानित करने के फैसले ने उनके गुस्से को और बढ़ा दिया है। बता दें कि लखनऊ में 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके पर योगी को ‘दलित मित्र’ का सम्मान दिया जाएगा। योगी को सम्मान दिए जाने की बात सामने आते ही विरोध होने लगा है।

बता दें कि अंबेडकर महासभा को 1998 में स्थापित किया गया था। महासभा के दो संस्थापक सदस्य सीएम योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र सम्मान दिए जाने के ऐलान का विरोध कर रहे हैं। पूर्व आईजी एसआर दारापुरी सहित दो सदस्यों ने योगी को सम्मान दिए जाने का विरोध करने की धमकी दी है। उन्होंने अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल पर बीजेपी के हाथों में खेलने का आरोप लगाया है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर हर सरकारी दफ्तर में लगाने का आदेश दिया था। इसके बाद राज्यपाल राम नाईक की सलाह पर अंबेडकर के नाम में उनके पिता का नाम भी जोड़ दिया गया। अब यूपी के सरकारी रिकॉर्ड में ‘भीमराव रामजी आंबेडकर’ लिखा जाता है। दावा है कि इसी नाम से उन्होंने संविधान की कॉपी पर दस्तखत किए थे।

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