आप भी जाने भारतीय महिलाओं को कौन से ऑनलाइन गेम्स पसंद आते है

नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान मंच पे-पाल द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई, जिसमें कहा गया है कि एक्शन गेम ने वैश्विक गेम क्षेत्र पर अपना वर्चस्व बरकरार रखा है और ज्यादातर भारतीय महिलाओं द्वारा डाउनलोड किए जाने वाले गेम पजल पर आधारित होते हैं.2018 ग्लोबल गेमिंग रिसर्च शीर्षक वाले अध्ययन में कहा गया कि पिछले तीन महीने में उपयोगकर्ता द्वारा डाउनलोड किए गए सभी गेमों में 65 फीसदी एक्शन गेम थे, जिसमें फाइटिंग, प्लेटफॉर्म और शूटर गेम समेत शारिरिक चुनौतियों पर अधिक जोर दिया जाता है.

क्या कहता है सर्वे : हालांकि भारतीय महिलाओं द्वारा डाउनलोड किए गए 60 फीसदी गेम पजल पर आधारित थे. अध्ययन के लिए, 25 बाजारों के करीब 25 हजार सक्रिय गेम खेलने वाले उपयोगकर्ताओं पर यह सर्वे किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल प्ले स्टोर 73 फीसदी हिस्सेदारी के साथ भारतीयों का गेम डाउनलोड करने की पहली पसंद है, जबकि एप्पल एप स्टोर 22 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है. 44 फीसदी भारतीय गेमर को इंटरनेट की धीमी स्पीड बेकार लगती है, जबकि 30 फीसदी भारतीय गेमर ने इंटरनेट डाटा कैप्स को उनके गेमिंग अनुभव में आने वाली बाधा करार दिया. वहीं 15 फीसदी भारतीय गेमर के लिए भाषा एक दुविधा रही.

न लगाएं गेम की लत : गेमिंग की लत की वजह से लोग अपने प्रियजनों से दूर होने लगते हैं और इसके अलावा इस लत की वजह से नींद और शारीरिक गतिविधियों में कमी की समस्या भी उत्पन्न होने लगती है. हार्ट केअर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि ऐसे लक्षणों पर आमतौर पर कम से कम 12 महीने तक निगाह रखनी चाहिए. धीरे धीरे, ऐसा व्यक्ति परिवार के सदस्यों से बातचीत कम कर देता है, क्योंकि उनमें से हरेक किसी न किसी स्क्रीन पर आंखें गड़ाये बैठे रहते हैं या किसी और उलझन में होते हैं.

क्या है उपाय : इस बारे में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जितेंद्र नागपाल का कहना है कि इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए 6 से 8 सप्ताह की थेरेपी चाहिए होती है. इसके तहत, उन्हें सिखाया जाता है कि गेम खेलने, असुविधा का सामना करने और अन्य स्वस्थ मनोरंजन के साधनों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कैसे खुद को संभालना है. अकेले बच्चे को ही ठीक नहीं किया जा सकता. आज माता-पिता के पास पुराने समय के विपरीत, अपने बच्चों के साथ बैठने या बात करने का समय ही नहीं है. बच्चों को इस तरह के व्यसनों से रोकने के लिए पर्याप्त समय और ध्यान देना महत्वपूर्ण है. समय की कमी को उपहारों से पूरा नहीं किया जा सकता, और न ही ऐसा करना चाहिए.

Back to top button