आप है 60 के पार, नए ख्वाब देखने का वक्त है अभी भी आपके पास

जो युवावस्था में करना चाहते थे। इसी समय आप अपनी आजादी का जश्न मना सकते हैं।

साठ के बाद जिंदगी का जश्न किस तरह जारी रखें? ये बड़ी चुनौती है। हालांकि ऐसा करना ज्यादा मुश्किल नहीं। इसके लिए जरूरी है- थोड़ी सी योजना, बहुत-सा जज्बा और अथाह दीवानगी की, ताकि पूरे होशो-हवास और गरिमा के साथ जिंदगी के रस को आखिरी बूंद तक पीने का जुनून बाकी रहे।

नए ख्वाब देखने का वक्त
उम्र का हर दौर खूबसूरत हो सकता है। नए सपने देखें और उन्हें पूरा करने की जुगत में लगे रहें। किसी भी हुनर को सीखने के लिए कभी देर नहीं होती। अच्छा होगा कि उम्रदराज लोग नए हुनर सीखें, अच्छे दोस्त बनाएं, नई जगहों पर घूमने की योजना तैयार करें, अच्छी किताबें पढ़ें। सार ये कि वे सब काम करें, जो युवावस्था में करना चाहते थे। इसी समय आप अपनी आजादी का जश्न मना सकते हैं।

बची ख्वाहिशों की लिस्ट
सेवानिवृत्ति के बाद अक्सर लोग सोच लेते हैं कि अब करने के लिए कुछ नहीं बचा, जबकि ये सच नहीं है। जरूरी है कि हमारे पास सुबह के वक्त बिस्तर छोड़ने की पुख्ता वजह बनी रहे। सक्रिय जिंदगी न सिर्फ अवसाद से बचाती है, बल्कि आत्मविश्वास भी बरकरार रखती है। कई निजी कम्पनियां सेवानिवृत्त लोगों को अच्छी तनख्वाहों पर नियुक्ति दे रही हैं। इसका लाभ आप भी ले सकते हैं।

नई पीढ़ी को समझें
अक्सर होता ये है कि पुरानी पीढ़ी, नई पीढ़ी के चलन और कायदों को मान्यता देने को तैयार नहीं होती। वह इस प्रक्रिया में खुद को निष्क्रिय बना लेती है। इससे उलट होना ये चाहिए कि कम उम्र के लोगों की शिकायत या आलोचना करने की जगह नई पीढ़ी की जीवनशैली और उनकी जिंदगी की जरूरतों को समझें और सहयोगी बनें। जरूरत पड़ने पर युवाओं को सुझाव दें, लेकिन हर वक्त टोकने से बचें।

मन से जवान रहें
साठ पार करते ही अधिकांश भारतीय निराशा का सामना करने लगते हैं। इन आंकड़ों की रोशनी में आवश्यक है कि जीवन की इस वेला में पहुंचते ही सकारात्मक विचारों का वन और गुलजार कर लिया जाए। इसके लिए जरूरी योजनाओं पर कम उम्र से ही काम शुरू कर देना जरूरी है। स्वस्थ मन शरीर को भी हौसलामंद बनाए रखता है, जिससे हमारे उत्साह में इजाफा होता रहता है।<>

 

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