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युवाओं को अराजकता के प्रति नफरत, सिस्टम को करते हैं फोलो : पीएम मोदी

पीएम मोदी ने 60वें एपिसोड में देशवासियों को नए साल की शुभकामनाएं दी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल का आखिरी 60वें एपिसोड ‘मन की बात’ में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि 2019 की विदाई के पल हमारे समाने हैं, अब हम न सिर्फ नए साल में प्रवेश करेंगे, बल्कि नए दशक में प्रवेश करेंगे.

तीसरे दशक में प्रवेश

उन्होने मन की बात के 60वें एपिसोड में देशवासियों को नए साल की शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा कि हम 21वीं सदी के तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहे हैं. इसमें देश के विकास को गति देने में वे लोग सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिनका जन्म 21वीं सदी में हुआ है.

पीएम मोदी ने कहा, इन दिनों हमारे देश के युवा सही व्यवस्था को पसंद करते हैं, वे सिस्टम को फोलो करते हैं. युवाओं को अराजकता के प्रति नफरत है. अव्यवस्था, अराजकता के प्रति उन्हें चिढ़ है.

जातिवाद, परिवारवाद जैसी अव्यवस्था को वो पसंद नहीं करते हैं. इस अवसर पर पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद को भी याद किया और कहा कि स्वामी जी का कहना था कि उनका विश्वास युवा पीढ़ी में हैं.

युवावस्था की कीमत

पीएम ने कहा, स्वामी विवेकानंद जी कहते थे कि युवावस्था की कीमत को न आंका जा सकता है. ये जीवन का सबसे मूल्यवान कालखंड होता है. आपका जीवन इस पर निर्भर करता है कि आप अपनी युवावस्था का उपयोग किस प्रकार करते हैं.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि भारत में ये दशक न सिर्फ युवाओं के विकास के लिए होगा बल्कि युवाओं के सामर्थ्य से देश का विकास करने वाला भी साबित होगा. भारत को आधुनिक बनाने में युवा पीढ़ी की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है.’

पीएम मोदी ने कहा, ‘मैंने 15 अगस्त को लालकिले से देशवासियों से एक आग्रह किया था और देशवासियों से स्थानीय उत्पाद खरीदने का आग्रह किया था. आज फिर से मेरा सुझाव है कि क्या हम स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों को प्रोत्साहन दे सकते हैं? क्या उन्हें अपनी खरीदारी में स्थान दे सकते हैं?’

उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी ने स्वदेशी की इस भावना को एक ऐसे दीपक के रूप में देखा जो लाखों के जीवन को रोशन करता हो. गरीब से गरीब के जीवन में समृद्धि लाता हो. सौ साल पहले गांधी जी ने एक बड़ा जन आन्दोलन शुरु किया जिसका एक लक्ष्य था भारतीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना.’

पीएम मोदी ने कहा, ‘क्या हम संकल्प ले सकते हैं कि 2022 तक जब आजादी के 75 वर्ष पूरे होंगे, इन 2-3 साल हम स्थानीय उत्पाद खरीदने के आग्रही बनें? भारत में बना, जिसमें हमारे देशवासियों के पसीने की महक हो, ऐसी चीजों को खरीदने का हम आग्रह कर सकते हैं क्या?’

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