झीरम आयोग की हुई सुनवाई, आयोग ने कांग्रेस का आवेदन किया निरस्त

15 दिनों के अंदर कांग्रेस को लिखित में अपना सवाल प्रस्तुत करना होगा

बिलासपुर।

बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा पर हुए नक्सली हमले के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री, तत्कालीन गृहमंत्री समेत अन्य को गवाही में बुलाने के लिए कांग्रेस की तरफ से प्रस्तुत आवेदन को आयोग ने खारिज कर दिया है।

दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद 4 अगस्त को जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा के न्यायिक आयोग ने फैसला सुरक्षित रखा था। कांग्रेस ने जस्टिस कृष्ण आयोग की रिपोर्ट, नानावटी आयोग और सिक्ख दंगे के आयोग का हवाला देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री, गृहमंत्री को बयान के लिए बुलाने की मांग की थी।

जस्टिस कृष्ण आयोग ने मुंबई दंगे की जांच के दौरान महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री, तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री को तलब किया था। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर बस्तर की झीरम घाटी में 25 मई 2013 को नक्सलियों ने हमला किया था। घटना में 29 लोगों की जान गई थी।

राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए जस्टिस प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में झीरम आयोग का गठन किया गया था। आयोग में अब तक 41 स्वतंत्र व्यक्तियों और 21 पुलिस व सीआरपीएफ के अधिकारियों का प्रतिपरीक्षण हो चुका है।

कांग्रेस की तरफ से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने 25 जनवरी 2018 को झीरम आयोग में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह, पूर्व सीएम डॉ.रमन सिंह और राज्य के गृहमंत्री ननकीराम कंवर को गवाह के रूप में बुलाने की मांग करते हुए आवेदन दिया था। कांग्रेस के आवेदन को आयोग ने खारिज कर दिया है।

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