छत्तीसगढ़

झीरम कांड : शहीद की पत्नी ने कहा-अब सच आएगा सामने

अंकित मिंज

बिलासपुर।

स्तर के झीरम घाटी हमले में शहीद आरक्षक दीपक उपाध्याय की पत्नी क्षिप्रा उपाध्याय को विश्वास है कि एसआईटी की जांंच से पीड़ितों को न्याय जरूर मिलेगा। षड़यन्त्र में शामिल लोगों का पर्दाफाश होगा। पीडित परिवारों में राज्य सरकार की एसआईटी जांच को लेकर खुशी जाहिर की है।

बताते चलें क्षिप्रा उपाध्याय के पति शहीद दीपक उपाध्याय तात्कालीन समय झीरम में तैनात थे। 25 मई 2013 को नक्सली हमले के समय शहीद उपाध्याय झीरम घाटी मेंं तैनता थे।

दीपक उपाध्याय की पत्नी क्षिप्रा उपाध्याय आज भी घटना को याद कर सिहर उठती है। क्षिप्रा ने बताया कि उनके पति 5 मई 2013 को विवाह के दूसरे वर्षगांठ पर घर आए थे। सब लोगों से मिलकर खुशी.खुशी अपनी ड्यूटी पर वापस जगदलपुर रवाना हुए।

घटना के दिन दोपहर लगभग एक बजे उनसे फोन पर बात भी हुई। उन्होंने बताया था कि वे झीरम घाटी में ड्यूटी कर रहे हैं। उनके साथ एक अन्य आरक्षक की भी ड्यूटी थी। लेकिन किन्ही कारणों से वह नहीं पहुंचा।

रात में दिल दहलाने वाली खबर आई कि झीरम घाटी में नक्सली हमले में बहुत से लोगों की मौत हो गयी है। नक्कसली हमले में पति दीपक उपाध्याय भी शहीद हो गये। दीपक अपने मां.बाप के इकलौते बेटे थे।

क्षिप्रा उपाध्याय न बताया कि अफसोस की बात है कि अभी तक हमले के पीड़ितों को न्याय नहीं मिल सका है। घटना में शामिल षड़यंत्रकारियों का नाम भी सामने नही आया है।

अब नवनिर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से उम्मीद है। उन्होने एसआईटी की घोषणा उम्मीद को जिदा किया है। उम्मीद है कि जांच के बाद षड़यत्रकारियों का नाम सामने आ जाएगा। मुख्यमंत्री का एसआईटी जांंच का निर्णय स्वागत योग्य है।

क्षिप्रा ने बताया कि सुरक्षा में कोई चूक बरती गई या फिर किसी पड़यंत्र के चलते घटना को अंजाम दिया गया। एसआईटी जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जैसा हमें बताया गया था कि ड्यूटी पर तैनात जवानों ने अपना कर्तव्य ईमानदारी और साहस के साथ निभाया था। इसके बावजूद इतने जघन्य नरसंहार के पीछे जरूर कोई षड़यंत्र हो सकता है। अब एसआईटी जांच से सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।

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